छिंद समिति में भारी फर्जीवाड़ा...! एक करोड़ के खाद -बीज की हेराफेरी.. अपेक्स बैंक की भूमिका पर उठे सवाल...
संचालक मंडल प्रबंधक कंप्यूटर ऑपरेटर समेत अपेक्स बैक को नोटिस
सारंगढ-खाद घोटाले में जिस बात की आशंका जताई गई थी वही सच अब सामने आ रही है। कलेक्टर के आदेश पर पिछले दिनो डीआरसीएस ने कुछ समितियों की जांच की थी। जिसमे बहुत बड़े -बड़े घपले सामने आए है। सबसे बड़ा मामला सारंगढ के छिंद समिति का है। यहाँ समिति संचालक मंडल व प्रबंधक आदि ने मिलकर एक करोड़ से ज्यादा कीमत का खाद -बीज की हेराफेरी की है। इस मामले में 18 लोगो को नोटिस जारी किया गया है। यह खरीफ सीजन खाद घोटाले के नाम रहा। रायगढ जिले में बड़े पैमाने पर यूरिया की कालाबाजारी ने किसान को त्रस्त कर दिया। रैक प्वाइंट से कई समितियों को खाद सप्लाई करने के बजाय रास्ते मे ही रुट डायवर्ट कर प्राइवेट व्यवसायी के पास गाड़ी पहुंचा दी जाती है। सबसे ज्यादा मात्रा में यूरिया खरीदी वालो की जांच की गई तो इसमें 80 प्रश भूमिहीन मिले ।इसके बाद कलेक्टर ने समितियों की जांच करने का आदेश दिया था।
उप पंजीयक सहकारी संस्थाए शिल्पा अग्रवाल ने सारंगढ के छिंद समित की जांच की। पता चला कि समिति जरुरत से कही ज्यादा खाद और बीज मंगवा लिया गया था। यहां से किसानों को कितना खाद व बीज दिया गया है इसका कोई हिसाब तक नही है। समिति में 57,39,355, रुपये का खाद का समायोजन किया गया लेकिन 92,76,331 रुपये खाद का कोई हिसाब नही मिला। इसी तरह 3,92,083 धान का समायोजन किया गया लेकिन 10,83,654 रुपये मूल्य का बीज किसको दिया गया।इसका कोई भी रिकॉर्ड नही मिला। इस तरह 1,03,58,985 रुपये कीमत के खाद-बीज की हेराफेरी कर बाहर किसी व्यपारी को बेच दिया गया। खाद को नगद या लोन के रूप में किसान को दिया जाना है। नगद बेचे गई खाद की राशिसमिति के एकाउंट में जमा होनी थी। अगर वस्तु लोन के रूप में खाद-बीज लिया गया है तो वह किसान के खाते में अपेक्स बैंक के एकाउन्ट में होना था लेकिन समिति में लाखों के खाद ओर बीज की बिक्री कर बैंक में समायोजन नही किया गया है।
अपेक्स बैंक की भूमिका पर उठे सवाल...
एक बार फिर अपैक्स बैंक की भूमिका पर सवाल उठे है ।खाद-बीज की सप्लाई के बाद समिति स्तर में समायोजन नही करने पर अपैक्स बैंक कोई कदम नही उठता । रैक पॉइंट से समिति तक खाद पहुचने के बीच होने वाली गडबडी को भी अपेक्स बैंक चुपचाप देख रहा है।अगर छिंद समिति में इतना अधिक खाद भंडारित किया गया था तो संबंधित किसान के नाम पर वस्तु लोन के रूप में यह कैसे प्रदर्शित नही हुआ। सुपरवाइजर ने इसकी मॉनिटरिंग ही नही की।
क्या कहती है डीआर
छिन्द समिति की जांच में पता चला की करीब एक करोड़ रूपये कीमत के खाद -बीज हिसाब नही मिला है। 18 लोगो को नोटिस दिया गया है।