कोविड सेंटर सारंगढ़ में अव्यवस्था अपने चरम पर...! भूखे पेट 2 ... - CG Sandesh

कोविड सेंटर सारंगढ़ में अव्यवस्था अपने चरम पर...! भूखे पेट 2 बजे तक रहने मजबूर मरीज... बाहर निकलो फिर तेरे को बताता हूँ बोलकर धमकाते कर्मचारी...! छोटे बच्चों और डायबिटीज मरीजों की हालत के जिम्मेदार कौन ?....

कहने को शासन - प्रशासन कोविड-19 के मरीजों की व्यवस्था के लिए दिन रात लगे हैं। संवेदनशील कलेक्टर भीमसिंह ने भी नोडल अधिकारियों को साफ निर्देश दिया है कि मरीजों के रखरखाव एवं नास्ता भोजन में कोई भी दिक्कत न आने पाये, परन्तु आज जो खबर हम आपको बताने वाले हैं उसे पढ़कर आप भी सोचने को मजबूर हो जाएंगे..!

सारंगढ़ में कोविड केअर हॉस्पिटल के तौर पे सी.पी.एम. कॉलेज को मरीजों हेतु चयन किया गया है, जहाँ एंटीजन एवं आर टी पी सी आर से पॉजिटिव मरीजों को रखा गया है।

इसी तारतम्य में जब हमारे रायगढ़ ब्यूरो हेड जगन्नाथ बैरागी को सर्दी खांसी की शिकायत हुई तो जिम्मेदारी पूर्वक उन्होंने अपना एंटीजन टेस्ट कराया जिसमे उनका रिपोर्ट पॉजिटिव बताया, उन्हें होम क़वारेंन टाईन की सलाह दी गयी। परन्तु उन्होंने कोविड सेंटर सी.पी.एम. में रहना स्वीकार किया जिससे कि वहां की वस्तुस्थिति से अवगत हो सकें।

2 अक्टूबर को जब उन्होंने दोपहर को सेंटर ने प्रवेश किया तो वहां पहले से मौजूद अन्य मरीजों ने बताया कि रूम की सफाई नही हुई है. वो स्वयं ही रूम की सफाई करते है. हमारे ब्यूरो हेड ने स्वयं झाड़ू मारकर सफाई किया तथा अन्य मरीजों की तरह नियमावली से रहने लगे।

लोगों से पूछताछ करने पर अन्य अव्यवस्थाओं के बारे में जानकारी मिली परन्तु उन्होंने उनकी बातों को अनदेखा करते हुए सभी को भरोशा दिलाया कि आगे सब ठीक होगा।

परन्तु एक दिन बाद आज दिनांक 04-10-2020 को प्रातः लोगों की भीड़ को कर्मचारियों द्वारा डांटने की आवाज़ सुनाई दी तो वहां पहुंचकर देखा तो कर्मचारियों का कहना है कि नास्ता समाप्त हो गया है। जबकि कई छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजर्ग के साथ साथ डाइबिटीज मरीजो को नाश्ता मिला ही नही है, और तो और स्वयं हमारे पत्रकार को भी नास्ता प्राप्त ही नही हुआ है।

एक व्यक्ति जो कोसीर से आये हैं उनके द्वारा जब नास्ते की मांग छोटे बच्चों के लिए किया गया तो नास्ता पहुंचाने वाले कर्मचारी ने कहा नास्ता नही है खतम हो गया नही मिलेगा, तू बाहर तो आ तो बताता हूं के साथ अन्य भद्दे शब्दो का प्रयोग किया गया।

ऐसे अपराधी समान व्यवहार कर्मचारियों द्वारा मरीजों को किया जा रहा है जैसे ये कोई जुर्म करके यहां आये हों। चंद्रा जी कोसीर के अनुसार- छोटा बच्चा भूखा है, अभी तक नास्ता नही मिला मुझे डाइबिटीज है टाइम से नास्ता खाना नही मिलेगा तो मेरे बच्चों और मेरे स्वास्थ्य का क्या होगा ?  कबतक मेरे बच्चों को बिस्किट खिला के रख पाऊंगा, तथा कलेक्टर महोदय से व्यवस्था को तत्काल सही कराने का निवेदन किया गया. वरना लोग कोरोना से पहले डाइबिटीज या अन्य बीमारियों से मर जाएंगे।

वहां मौजूद एक सरपंच पिता ने कहा कि यहाँ नास्ता नही मिल रहा सिर्फ दवा ही दिए जा रहे हैं कोई बात सुनता ही नही।

एक अन्य मरीज का कहना है कि कल से आये हैं अभी तक कुछ व्यवस्था ही नही है सिर्फ दवा ही मिला है बिना कुछ खाये दवा कैसे खाएं?

एक अन्य मरीज जो 1 अक्टूबर से यहां एडमिट हैं जो शुगर पेशेंट हैं जिन्हें डॉक्टरों ने रोटी ही खाने को कहा है, जिसकी जानकारी इन्होंने चीख चीखकर कर्मचारियों को प्रतिदिन कहा कि कृपया मुझे रोटी दिला दीजिए मेरा शुगर लेबल बड़ जाएगा तो उनका साफ कहना है कि जो मिलेगा चुप चाप खाओ।

जब हमारे पत्रकार ने नास्ता एवंम भोजन प्रबंधन देखने वाले जनपद सी ई ओ साहब को अपने नम्बर से बार बार कॉल करके मरीजों की समस्या को अवगत कराने में लिए फोन किया तो साहब ने फोन उठाना भी मुनासिब नही समझा।

अभी हमारे पत्रकार जगन्नाथ बैरागी को वहां गए तीसरा दिन है जिसमे की ऐसे समस्याओं से रूबरू होना पड़ रहा है।

अभी आम जनता के हर आवाज को, कोविड सेंटर की सही स्थिति को जनता, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों से लेकर सरकार तक सही स्थिति को पहुंचाया जाएगा, आप सभी हमारे साथ जुड़े रहें।


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