काल भैरव जयंती आज, शिव के पांचवे रुद्र अवतार, ऐसे करें पूजा,... - CG Sandesh

काल भैरव जयंती आज, शिव के पांचवे रुद्र अवतार, ऐसे करें पूजा, इन बातों का रखें ध्यान

मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन 7 दिसंबर को काल भैरव अष्टमी हर्षोल्लास से मनाई जाएगी। ज्योर्तिविदों का मत है कि इस दिन तंत्र के देवता काल भैरव की प्रसन्नता के लिए विधि-विधान से उनका पूजन करना चाहिए। ज्योर्तिविद् पं. विजय अड़ीचवाल ने बताया कि भैरव की पूजा सांध्यकाल या रात्रि में करना चाहिए। उनके सामने सरसो के तेल का दीपक लगाए। इसके बाद उड़द या दूध की बनी हुई वस्तुए उन्हें अर्पित करे। तामसिक पूजन करने वाले उन्हें मदिरा भी अर्पित करते हैं। साथ ही व्रत रखकर भैरव कथा भी पढ़ना चाहिए। ऐसा करने से आसपास की नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। आर्थिक तंगी से लोगों को राहत मिलती है। भगवान शिव के दो स्वरूप में एक बटुक भैरव और दूसरे काल भैरव है। बटुक भैरव सौम्य स्वरूप है, जबकि काल भैरव रौद्र रूप है। काल भैरव की उत्पत्ति शिव के क्रोध के कारण हुई थी। माना जाता है कि उनके पूजन से सर्व सद्धियों की प्राप्ती होती है।

काल भैरव अष्टमी के दिन ये काम न करें

भैरव अष्टमी पर श्वान की अवहेलना न करें। इस दिन श्वान का पूजन और उसे भोजन कराने का विशेष महत्व है। गृहस्थ लोगों को भगवान भैरव की तामसिक पूजा यथा संभव नहीं करना चाहिए। भैरव तंत्र के देवता माने जाते है इसलिए उनके सौम्य स्वरूप बटुक भैरव की पूजा करे। उनकी पूजा किसी के नाश के लिए न करें। संभवत: भैरव की साधना योग्य गुरु के सानिध्य में करना चाहिए।


सभी सिद्धियों को प्रदान करते भैरव

काली मंदिर खजराना के शिवप्रसाद तिवारी बताते है कि मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन काल भैरव जयंती मनाई जाती है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि इस दिन उनका जन्म हुआ था। काल भैरव को शिवजी का अवतार माना जाता है जो इनका विधिवत पूजन करता है उसे सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती है। उन्हें तंत्र का देवता माना जाता है। इसके चलते भूत, प्रेत और उपरी बाधा जैसी समस्या के लिए काल भैरव का पूजन किया जाता है। इस दिन काले कुत्ते को दूध पिलाने से काल भैरव का आर्शीवाद प्राप्त होता है। काल भैरव को दंड देने वाला देवता भी कहा जाता है इसलिए उनका हथियार दंड है। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से भी उनकी विशेष कृषा प्राप्त होती है। उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति चौकी पर गंगाजल छिड़ककर स्थापित करे। इसके बाद काल भैरव को काले, तिल, उड़द और सरसो का तेल अर्पित करे। अंत में श्वान का पूजन भी किया जाता है। इस दिन लोग व्रत रखकर भजनों के जरिए उनकी महिमा भी गाते है।



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