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लॉकडाउन में मोबाइल एप के माध्यम से कुछ फाइनेंस कंपनियों ने निकाला माइक्रो लोन का ऑफर, टारगेट हैं युवा, पैसे नहीं देने पर निजी तस्वीरें कर रहे वायरल. बाहरी प्रदेशों में कई मामले आत्महत्या करने पर मजबूर युवा

पुलिस अधिकारियों ने बताया लॉकडाउन के दौरान मोबाइल एप के माध्यम से कुछ फाइनेंस कंपनियों ने माइक्रो लोन का ऑफर निकाला। इसमें किसी तरह के दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं थी। एप डाउनलोड करना था। उसमें मांगी कुछ जानकारी देनी थी। फिर लोन मिल रहा था। माइक्रो लोन में 2-10 हजार रुपए का कर्ज दिया जा रहा था। ज्यादातर युवाओं ने एप के माध्यम से लोन लिया है। अब ऐसी कंपनियों का नाम लेकर ही ऑन लाइन सूदखोरी की जा रही है।

आंकड़े बताते हैं किलाखों भारतीय तुरंत मिलने के लिए इंस्टेंट-लोन ऐप डाउनलोड कर रहे हैं, जिनमें से कई चीनी कंपनियों के पास हैं जो भारत में काम करने के लिए स्थानीय कंपनियों की भागीदारी कर रहे हैं। उधारकर्ताओं का कहना है कि वे महामारी के दौरान भुगतान नहीं कर सकते हैं, और आरोप लगाया कि वे अपने ऋणों पर भयानक खतरों का सामना करते हैं। खतरों में आधिकारिक दिखने वाले - लेकिन नकली - पत्र, या रिश्तेदारों को परेशान करना शामिल है।

बाहरी प्रदेशों में कई मामले आत्महत्या करने पर मजबूर युवा,

कई बाहरी देशों में ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे है, lockdown में ऑनलाइन धोखाधड़ी के अंदर यह फेक लोन ऍप ने भी महामारी और मजबूरी का फायदा उठाते हुए लोगो को फसाया है. तमिलनाडु में इसी मामले में एक 23 साल के युवती ने दबाव में आकर खुदखुशी कर ली

नहीं है RBI से रजिस्टर्ड - सिर्फ दो से चार लोन app RBI द्वारा रेजिस्टर्ड है बाकी कई एप्प फर्जी है,

ऑनलाइन माइक्रो लोन का ट्रेंड शुरू होने के साथ ही ऑनलाइन सूदखोरी का रैकेट सक्रिय हो गया है। युवा और कॉलेज में पढ़ाई करने वाले उनका टारगेट हैं। शहर में दो सौ से ज्यादा युवाओं को ऑन लाइन सूदखोर कॉल कर चुके हैं। फोन पर वे बताते हैं कि आपने लॉकडाउन में 5 हजार कर्ज लिया था। अब आपको 10 हजार चुकाने हैं, जो पैसे नहीं दे रहे हैं कि उनके मोबाइल पर सेव सारे नंबरों और फोटो को हैक कर लिया जा रहा है।

फिर उनके एक-एक परिचित को फोन कर उन्हें बदनाम किया जा रहा है। मोबाइल में सेव निजी तस्वीरों को भी वायरल किया जा रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद पुलिस ने अब तक एक भी केस दर्ज नहीं किया है। पुलिस के इस रवैये से युवाओं के साथ उनके परिजन भी हैरान हैं। आखिर ऑनलाइन बदनामी करने वालों से किस तरह बचा जाए।

ऑनलाइन सूदखोर एक-दो नंबरों से नहीं 25-25 नए-नए नंबरों से सुबह से रात तक फोन कर रहे हैं। कई बार अपशब्दों का प्रयोग करने के साथ-साथ जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इससे भी सूदखोरों को तसल्ली नहीं हो रही है। युवाओं के मोबाइल पर सेव एक-एक नंबर पर कॉल करने के साथ वाट्सअप में मैसेज कर कर्ज लेने की झूठी बात बताकर बदनाम किया जा रहा है। एक युवक के तो प्राइवेट फोटो वायरल कर दिए गए हैं।

सिविल लाइंस, डीडी नगर, सेजबहार समेत दो अन्य थानों में इस तरह की शिकायतें की जा चुकी हैं। हालांकि पुलिस ने किसी भी प्रकरण में केस दर्ज नहीं किया है। ज्यादातर को शिकायत आवेदन लेने के बाद लौटा दिया जा रहा है, कुछ थानों में बाकायदा लिखकर दे दिया जा रहा है कि ये प्रकरण पुलिस के हस्तक्षेप के योग्य ही नहीं है।




छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े शहरो के साथ साथ कई छोटे शहरो में भी बड़ी तादाद में नवयुवक इस जाल में फसे हुए है,ऑनलाइन ज्यादा ब्याज लेकर लोन देने वाले फ्रॉड कंपनी की देय डेट होने से उकत लोन कंपनी वालो की कोई मर्यादा व समय सीमा भी नहीं है,कर्मचारी के व्यवहार काफी अपमानजनक है जिससे पता चलता है कुछ धोकेबाज़ और ठगी द्वारा यह लोन ऍप संचालित किआ जाता है. छवि धूमिल होने के डर से प्रदेश के युवा किसी अपराध मे न फसे इसका डर अब जायज़ है.

लोगो से अपील है की ऐसे किसी भी loan के मोबाइल एप्प के बातो में ना आये, ऐसी कंपनियां आपके कॉन्टेक्ट्स चुरा कर आपको ब्लैकमेल कर सकती है,

एप पर कर्ज लेने वाले और ऑनलाइन गेम खेलने वाले हो जाए सावधान : एसएसपी अजय यादव ने बताया कि मोमो समेत तकरीबन 55 से ज्यादा कंपनियों ने एप और लिंक माध्यम से माइक्रो लोन दिया है। इसमें ज्यादा फर्जी कंपनियां है। कंपनियों ने अपनी एडवांस तकनीक से एप डाउनलोड कराने का झांसा देकर मोबाइल का पूरा डेटा हैक कर लिया है। मोबाइल पर सेव कांटेक्ट नंबर, फोटो, वीडियो और बैंक से संबंधित कई अहम जानकारी ठगों के पास पहुंच गई है। कुछ मामले आए हैं, जिसकी जांच में साइबर सेल टीम को लगाई गई है। ऐेसे मामलों पर केस दर्ज किया जाएगा।




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