राजधानी से शुरू की गई मुहिम, प्रदेश में गोबर के कंडे से जलेगा सरकारी अलाव
अभी तक अलाव में लकड़ी का इस्तेमाल होता
रहा है। सरकार का कहना है कि गो-काष्ठ के उपयोग से पेड़ों की कटाई पर अंकुश
लगेगा। वहीं प्रदूषण पर रोकथाम के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा
मिलेगा।कहा जा रहा है, गो-काष्ठ का उपयोग होने से
नगरीय निकायों को लाखों रुपए की बचत होगी। वहीं गोबर से कंडे बना रहे
महिला स्व-सहायता समूह की आमदनी और रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
छत्तीसगढ़ के शहरों में गोबर के कंडे से चौराहों पर अलाव जलाने की तैयारी
है। सरकारी स्तर पर गोबर के इन कंडों को ‘गो-काष्ठ’ कहा जा रहा है। रायपुर
में इससे अलाव जल भी रहे हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार
डहरिया ने गोठानों में गोबर से तैयार गो-काष्ठ का उपयोग ठंढ भगाने के लिए
अलाव के रूप में करने के निर्देश दिए हैं। आम लोगों को ठंढ के प्रकोप से
बचाने के लिए शहरों में चौक-चौराहों और प्रमुख स्थलों पर अलाव जलाया जाता
है।
रायपुर के महापौर एजाज ढेबर ने बताया, आमजनों को शीतलहर से राहत दिलाने के लिए रायपुर नगर निगम मुख्य सार्वजनिक स्थलों पर गो-काष्ठ से अलाव जलाने की व्यवस्था कर रहा है।महापौर ने कहा, सभी 10 जोन के आयुक्तों को सतत मॉनिटरिंग कर लोगों को हर संभव सुविधा प्रदान करने को भी कहा गया है।
नगरीय निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में स्थानीय प्रशासन अलाव की व्यवस्था करता है। प्रदेश में नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों की संख्या 166 है।