सिरको बांध में संस्कार साहित्य मंच का नववर्ष स्नेह मिलन सह काव्य गोष्ठी
गत दिनांक 2 जनवरी दिन शनिवार को सिरको के पावन भूमि पर बांध के किनारे प्रकृति की गोद में संस्कार साहित्य मंच छत्तीसगढ़ का नववर्ष स्नेह मिलन सह काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। उपरोक्त कार्यक्रम में भोजन के पश्चात कल्पना चौहान के अतिथ्य में एवं प्रियमंजरी कुमार की उपस्थिति में काव्य पाठ का प्रारंभ किया गया। काव्यपाठ की शुरुआत परशुराम चौहान एवं सुकमोती चौहान रूचि जी के मधुर आवाज में सरस्वती वंदना से की, तत् पश्चात गणपत देवदास के संचालन में काव्यपाठ की प्रथम आहुति शंकर सिंह सिदार रत्नेश ने नव वर्ष की बधाई गीत की प्रस्तुति के साथ की, उसके पश्चात श्री सुन्दर लाल डडसेना मधुर ने शानदार शायरी प्रस्तुत की। अगले क्रम में गीता सागर ने अपने सुंदर काव्य पाठ से समा बांधी।
फिर विनोद कुमार जोगी ने कुंवारों की दुखड़ा सुनाते हुए उनके कुंवारे होने का कारण बताते हुए सुन्दर व्यंग्य रचना प्रस्तुत की। अगले क्रम में गोकुलानंद चौहान ने अपने हास्य से दर्शकों को लोट-पोट कर दिया। तत् पश्चात ललित भार ने सुन्दर काव्य पाठ किया फिर कल्पना ने बहुत ही मधुरिम गीत प्रस्तुत की। अगले क्रम में चंदर सिदार जी के श्रृंगार के गीत एवं सुश्री अनुषा सोना के गीत सुन दर्शक झूम उठे।
तत् पश्चात
मानक दास मानिकपुरी ने हंसी के पटाखों से सभी का दिल जीत लिया। अगले क्रम
में प्रेमचंद साव ने कलियुग पर सुन्दर छत्तीसगढ़ी गीत प्रस्तुत की।
फिर ग़ज़लकार परशुराम चौहान ने मेंहदी के मधुर ग़ज़ल प्रस्तुत किया।
अगले क्रम में सुकमोती चौहान रूचि ने सवैया छंद की चंद पंक्तियां
प्रस्तुत की और फिर धनीराम नंद मस्ताना के मोबाइल वाले गीत ने सभी
दर्शकों में जादू सा कर दिया एवं अंतिम कड़ी में डिजेन्द्र कुर्रे
कोहिनूर ने श्रृंगार रस से सराबोर मुक्तक प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत
में सभी का आभार व्यक्त करते हुए मंच के अध्यक्ष श्री धनीराम नंद मस्ताना
ने आगे भी इसी तरह के कार्यक्रम के आयोजन की कामना के साथ कार्यक्रम
समाप्ति की घोषणा की।