अधूरे सड़क पर लगा दिया बैक डेट में कंप्लीट होने का बोर्ड...!ठेकेदार मस्त,प्रशासन पस्त....
सड़क को लेकर रायगढ़ जिले की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। बदहाल सड़कों के साथ अब आम आदमी ने जीना सीख लिया है। यहां सड़कों का निर्माण तो होता है मगर कुछ महीनों में उसकी स्थिति जर्जर हो जाती है। फिलहाल रायगढ़ में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है यहां सड़क पूरी नहीं हुई है मगर सड़क पूरी होने से पहले ही सड़क पूरा होने का बोर्ड उस पर लगा दिया गया है, वह भी बैक डेट में ! इसकी शिकायत जिला कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक की गई है। मामला गेरवानी से लेकर सराईपाली रोड तक का है।
निर्माण कार्य पूर्ण होने का बोर्ड
अपनी शिकायत में गेरवानी निवासी सुशील कुमार अग्रवाल ने बताया कि 459.95 लाख की लागत गेरवानी से सराईपाली तक 7.2 किलोमीटर रोड का निर्माण कराया गया है। निर्माण कराने वाली एजेंसी मेसर्स सुनील कुमार अग्रवाल, चांदनी चौक रायगढ़ की है। सड़क अभी पूरी नहीं हुई है। इनमें से सड़क के कुछ भाग का काम अभी हाल ही में कुछ महीने पहले हुआ है। मगर ठेकेदार के द्वारा सड़क पूर्ण होने का बोर्ड लगा दिया गया है।
रायगढ़ कलेक्टर से की गई शिकायत:-
सड़क 2021 तक पूरी नहीं हुई है। उस सड़क पर 12-09-2019 तारीख को ही सड़क का निर्माण कार्य पूर्ण होने का बोर्ड लगा दिया गया है। सूचना पटल के अनुसार सात पुलों का वर्णन है मगर एक भी नया पुल नहीं बना है। ठेकेदार द्वारा सड़क की गारंटी 5 साल की दी गई है मगर सड़क तो अभी से टूटना शुरू हो गई है।
अपने आवेदन में सूचना पटल को लेकर सुशील कुमार ने कई गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा है कि 12 सितंबर 2019 को ही सड़क का निर्माण हो गया था तो उस समय यह बोर्ड क्यों नहीं लगाया गया..? उन्होंने आशंका जताई है कि बोर्ड लगाकर आम जनता और प्रशासन को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने इस मामले में कार्यवाही करने का निवेदन भी किया है।
फिलहाल एक आम आदमी ने अपना काम कर दिया है। उसके सामने जो गलत दिखा उसने उसे सबके सामने उजागर किया है। अब प्रशासन इसमें किस तरह की जांच करता है, यह समय बताएगा। लेकिन एक बात है पूरा निर्माण कार्य जिस प्रशासनिक इंजीनियर देखरेख में हुआ है, उसका नाम भी बोर्ड पर अंकित है। अब उन्होंने इसकी किस प्रकार और कितनी निगरानी की है ? यह वहां के हालात तस्वीरें और यह शिकायत अब खुद बयां कर रही है।
क्या कहते है विभागीय अधिकारी:-
इस मामले में शिकायतकर्ता ने बताया कि उसकी संबंधित विभाग के अधिकारी से बात हुई थी जिसने कहा था कि यह वह गलती से लग गया होगा। चलिए एक बार के लिए मान लिया जाए कि वह बोर्ड गलती से लगा दिया गया है, लेकिन सवाल ये उठता है जब सड़क पूरी हुई नहीं तो बैक डेट में कंप्लीट का बोर्ड क्यों लगा..? यह भी एक यक्ष प्रश्न है, यह एक सरकारी बोर्ड है, कोई किराए के मकान का नेम प्लेट नहीं ! इसमें विभाग और एक अधिकारी का नाम लिखा हुआ है! उस अधिकारी ने भी एक बार जाकर उस जगह को देखा तो होगा ? सवाल कई है, मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।