सब्जियों और फुलों से बना हर्बल गुलाल रंगेंगा इस बार चेहरो को , कटघोरा विकासखण्ड के धवईपुर और ढेलवाडीह, अमरपुर की महिलाओं ने बनाया हर्बल गुलाल
जब भी होली करीब आती है हर किसी के मन में उत्साह का गुबार छा जाता है, लेकिन आजकल के केमिकल वाले रंगों से हर किसी का मन भी घबराता है। पर अब चिंता की बात नही, स्व सहायता समूह की महिलाओं ने अथक प्रयास से पालक भाजी, लाल भाजी, चुकंदर, हल्दी, गुलाब से हर्बल गुलाल तैयार किया है। जो हर किसी के चेहरे को रंगने के लिए तैयार है।कटघोरा विकासखण्ड के धवईपुर, ढेलवाडीह और अमरपुर गोठान को संचालित करने वाली 6 स्व सहायता समूह ने इस बार होली को ख़ास बनाने की तैयारी कर ली है। इन समूह की 60 महिलाओं ने सब्जियों, फूलों की पंखुड़ियों, गुलाब जल, चंदन, खस के इत्र आदि से हर्बल गुलाल बनाया है। खास बात यह है कि इसमें किसी तरह का रसायन का उपयोग नहीं किया गया। पालक भाजी से हरा रंग, लाल भाजी से गुलाबी रंग, चुकंदर से लाल रंग, हल्दी से पीला रंग बनाया गया है।गुलाब, गेंदा, टेसु जैसे फूलों की पंखुड़ियों से भी यह महिलाएं प्रीमियम क्वालिटी का हर्बल गुलाल बनाने में जुटी है।
महिला क्लस्टर संगठन की अध्यक्ष देवेश्वरी जायसवाल बताती हैं कि उन्हें और उनके जैसी लगभग 60 महिलाओं को दो चरणों में आजीविका मिशन के तहत हर्बल गुलाल बनाने का प्रशिक्षण मिला है। इसमें किसी भी तरह के रासायनिक पदार्थों का उपयोग नहीं किया गया है। इसमें चेहरे में निखार के लिए हल्दी, चंदन, गुलाब जल आदि मिलाया जा रहा है। रासायनिक पदार्थों का उपयोग नहीं होने से यह गुलाल त्वचा, आंख, बाल आदि के लिए हानिकारक नहीं होगा और इसे बिना किसी चिंता के लोग होली में उपयोग कर सकेंगे। इसके साथ ही यह आसानी से शरीर से छूट भी जाएगा।
धवईपुर जननी महिला क्लस्टर संगठन से जुड़ी महिला समूह की पीआरपी फूल बाई मरकाम ने बताया कि एक किलो हर्बल गुलाल बनाने में 60 रूपये खर्च आता है। स्थानीय बाजार में 100 रूपये प्रति किलो की दर से बेचेंगे। बाजार में हर्बल के नाम से बिकने वाले गुलाल के मुकाबले यह अधिक विश्वसनीय और कम कीमत का है। देवेश्वरी जायसवाल ने आशा जताई है कि पांच क्विंटल हर्बल गुलाल से समूहों को होली के सीजन में 50 से 60 हजार रूपये का फायदा हो सकता है।
समूहों ने आजीविका मिशन के अधिकारियों के साथ मिलकर स्थानीय थोक एवं फुटकर व्यापारियों के साथ स्वयं भी दुकानें लगाकर इस गुलाल की बिक्री की योजना तैयार कर ली है। इसके पहले समूह द्वारा कोरोना काल में मास्क बना कर अच्छी आय अर्जित की थी तथा रक्षाबंधन में राखियां तथा दीपावली में गोबर के दिये बनाने का काम महिला समूह द्वारा किया गया था। गोठान में गोबर व मिट्टी से कई तरह की सामाग्राी जैसे लक्ष्मी पांव, प्रतिमा, दीया, गमला आदि सजावट के सामान तैयार किए जा रहे हैं। हर्बल गुलाल मिलाकर इन आकृतियों को और भी आकर्षक बनाया जा सकता हैं। जननी स्व सहायता समूह की अध्यक्ष देवेश्वरी का कहना है कि गुलाल की उपयोगिता को विविधता देने के लिए महिलाओं को जानकारी दी जा रही है, जिससे वे इसका अधिक से अधिक लाभ ले सकें। महिलाएं गुलाल के अलावा आचार, पापड़, अगरबत्ती आदि घरेलू सामान भी तैयार कर रही हैं। इससे आत्मनिर्भरता के लिए उन्हे आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।