बठेना कांड पर विपक्ष का सदन में हंगामा, क्यों लाया गया स्थगन प्रस्ताव, सदन में क्यों गूंजा शर्म करो का नारा नेता प्रतिपक्ष ने लगाया आरोप- हत्या को आत्महत्या बताने पर तुली सरकार
पाटन के बठेना गांव में सामूहिक आत्महत्या के मामले आज विधानसभा में विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा और स्थगन प्रस्ताव लाया। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने इस मूद्दे पर चर्चा कराने की बात रखी।विधानसभा का बजट सत्र आज हंगामे के साथ शुरू हुआ। पाटन के बठेना गांव में हुए आत्महत्या कांड पर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि यह घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन इससे भी दुर्भाग्य यह हैं कि यह हत्या है जबकि इसे आत्महत्या करार दिया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या यही गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ है। इस तरह की आत्महत्या हमने नही देखी सुनी। दर्दनाक घटना है। झकझोरने वाली है। अनाचार, हत्याएं, आत्महत्या की घटना हो रही है। इस पर चर्चा कराना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री विधायक डॉ रमन सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या कोई पिता अपनी बेटी पत्नी को इस तरह जलाकर मारेगा? हमने वहां पाया कि दोनों बाप बेटे को जब फांसी से उतारा गया तो दोनों के हाथ पैर जले हुए थे। किस परिस्थिति में ऐसा हुआ। कोई वीभत्स तरीके से ऐसे कैसे कर सकता है। किसान परिवार सहित आत्महत्या क्यों कर रहे हैं।
विधायक रंजना साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री के इलाके में ही इस तरह की घटनाएं क्यों हो रही हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के परिवार में पैरा और छेना एक जगह नही होते।
विधायक डमरूधर पुजारी ने भी उनकी बातों का समर्थन किया।
विधानसभा उपाध्यक्ष मनोज मंडावी ने सदन की आसंदी से स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिया। इसके बाद भाजपा विधायक विरोध जताने लगे। विपक्षी दल ने सरकार शर्म करो शर्म करो के नारे लगाये और उन्होंने स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार करने की मांग रखी। सदन के गर्भ गृह में आने पर भाजपा के सभी विधायक निलंबित कर दिए गए। विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि पूरे प्रदेश में भय और आतंक व्याप्त है। कानून व्यवस्था भी लचर हो गई है। उन्होंने इस घटना की निंदा की और निष्पक्ष जांचकर दोषियों को सजा दिलाने की मांग रखी।