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ओपन-क्लोज लिखने वालों पर पुलिस की कार्यवाही... बड़ी मछलियों पहुंच से बाहर...!

जिले में सट्टेबाजी किसी से छुपी नही है, शहर में हर सटोरिये को सट्टे का हर ठिकाना मालूम रहता है,कहीं चोरी-छुपे तो कहीं खुलेआम सट्टा खेला और खेलाया जा रहा है। बड़े लोग ऑनलाइन एप तो कुछ लोग कागज के माध्यम से इस खेल को खेल रहे हैं। पुलिस को सूचना भी दी जाती है जिसमे कुछ पट्टी लिखनेवालों पर पुलिसिया कार्यवाही भी होती है, लेकिन जो मुख्य खाईवाल हैं उन तक पुलिसिया कार्यवाही नही हो पाती। लेकिन कुछ थानेदार ऐसे भी होते हैं कि इस आपराधिक खेल के लिए हर सम्भव प्रयास करते हैं। चक्रधर नगर थाना क्षेत्र में चल रहे अवैध सट्टा के खेल पर लगाम लगाने के लिए थाना प्रभारी अभिनव कांत एंड टीम ने कमर कस लिया है। कल थाना स्टाफ द्वारा कई जगहों पर छापेमारी कार्रवाई किया गया है।

इस दौरान –

1- मालीडीपा गली में सट्टा पट्टी लिखते अनुज यादव पिता भुनेश्वर यादव उम्र 25 साल निवासी बोइरदादर से सट्टा पट्टी व ₹520 की जब्ती
2-बंगाली पारा काली मंदिर के पास रवि देवांगन पिता महेत्तर देवांगन उम्र 45 वर्ष निवासी गोपालपुर चक्रधर नगर से नगदी ₹620 व सट्टा पट्टी
3-अंबेडकर आवास निगम कंपलेक्स के पास आरोपी अनिल देवांगन पिता तीजराम राम देवांगन उम्र 35 वर्ष निवासी अंबेडकर आवास जप्ती 1200 व सट्टा पट्टी
4-बोइरदादर स्कूल के पास गोविंद प्रधान पिता जागेश्वर प्रधान उम्र 59 वर्ष निवासी विनोबा नगर रायगढ़ को नगदी रकम 700 व सट्टा पट्टी के साथ गिरफ्तार किया गया है जिन पर थाना चक्रधरनगर में 4-क जुआ एक्ट की कार्यवाही की गई है।

लेकिन चारों जगह के छापेमारी में पुलिस को 5000 भी प्राप्त नही हुवी जबकि सिर्फ रायगढ़ शहर में एक दिन में लाखों का दांव लगाया जाता है। जिसमे 70% दांव मोबाईल के माध्यम से ऑनलाईन ट्रांजेक्शन द्वारा होने की बात कही जा रही है। और जिनलोगों को पुलिस की टीम ने पकड़ा है वो सिर्फ 5 या 10% में अलग अलग खाईवाल के लिए काम करते हैं।
इनके आका कोई और हैं।

क्या है सट्टे का मकड़जाल:-

कम समय मे अधिक पैसे कमाने का लालच और 1 रुपये में 9 कमाने का सोच इस दलदल का मुख्य कारण है।
कल्याण, मिलन, भूतनाथ, राजधानी, मैन बाज़ार सहित कई गेम रायगढ़ में खेलाया जा रहा है जिसमे मुख्य दांव कल्याण और राजधानी में लगाया जाता है।
जहां ओपन/ क्लोज में 1 का 9 और जोड़ी में 1 का 90 रुपये का लालच दिया जाता है। जिससे आकर्षित होकर कई व्यक्ति जिसमे मजदूर, युवा और विद्यार्थी भी फंस जाते हैं और खुद को लूटा हुवा महसूस करते हैं। कइयों के घर-बार बिकने की नौबत भी आ जाती है।
इस सट्टे के मकड़जाल से बाहर निकालने के लिए संवेदनशील एसपी संतोष सिंह को कमर कसनी ही पड़ेगी।


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