टेंट के नाम से निकाल लिए लाखों और खरीदी की गई केवल 4 हंडियां !
वन और वन्य जीवो की सुरक्षा के लिए वन विभाग की ओर से वन समितियां बनाई गई हैं। जिन्हें कुछ अधिकार भी दिए गए , लेकिन इन वन समितियों में से कई वन समितियां अब औचित्यहीन हो गई हैं , वहीं कईयों में खरीदी के नाम पर सरकारी रुपए की बंदरबांट की जा रही है।
ताजा मामला टेंट की खरीदी का है । रायगढ़ वन मंडल क्षेत्र अंतर्गत कई वन प्रबंधन समितियों की ओर से लाखों रुपए की टेंट सामग्री खरीदे जाने के नाम पर आहरण कर लिया गया है, लेकिन मौके पर केवल चार हंडिया ही मौजूद हैं। बाकी के बर्तन और अन्य सामग्रियां कहां गई या फिर इनकी खरीदी ही नहीं हुई यह जांच का विषय है।
विजयपुर वन समिति भी संदेह के घेरे में..
रायगढ़ वन मंडल मुख्यालय से कुछ दूर पर ही स्थित विजयपुर वन प्रबंधन समिति का भी कुछ ऐसा ही हाल है। यहां भी ₹100000 से भी ज्यादा की खरीदी टेंट के नाम पर बताते हुए खाते से राशि आहरित कर ली गई है, लेकिन मौके पर केवल चार बर्तन ही नजर आ रहे हैं। आशंका इस बात की व्यक्त की जा रही है कि खाते से राशि आहरित कर उसका निजी उपयोग कर लिया गया है और औपचारिक तौर पर चार बर्तन रखकर उसे ही टेंट का सामान बता दिया गया है। उच्च अधिकारियों को इन आरोपों की जांच करानी चाहिए ताकि वन प्रबंधन समितियों और उठ रहे भ्रष्टाचार के ऐसे सवालों पर विराम लग सके।
नगर निगम क्षेत्र में आने के बाद अस्तित्व में क्यों है विजयपुर वन प्रबंधन समिति. ?
अब तक ग्रामीण क्षेत्रों मैं वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से विभाग वनों की देखरेख करता था। विजयपुर वन प्रबंधन समिति भी अपनी स्थापना के वक्त ग्राम पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ही था , लेकिन पिछले कुछ सालों से विजयपुर अब ग्राम पंचायत नरेगा नगर निगम का एक वार्ड हो चुका है मतलब यह है कि अब यह शहरी क्षेत्र हो चुका है। ऐसे में ग्राम पंचायत स्तर पर गठित वन प्रबंधन समिति का यहां क्या औचित्य है। किस मोह के कारण वरिष्ठ अधिकारियों ने अब तक इस वन प्रबंधन समिति को अपने सीने से लगा रखा है।