शासन प्रशासन की सरपंच पति व सचिवों को आशीर्वाद प्राप्त , इसल... - CG Sandesh

शासन प्रशासन की सरपंच पति व सचिवों को आशीर्वाद प्राप्त , इसलिए ग्रामीण कर रहे हैं फरियाद....जिम्मेदार अधिकारी मौन, तो जनता की सुनेगा कौन...!

लगातार सुर्खियों में रहने वाला बरमकेला ब्लॉक के ग्राम पंचायत गोबरसिंघा विगत वर्ष से वर्तमान समय तक कोरोना का कहर जारी है और इसी वजह से आज भी पूरा देश ग्रसित है तथा प्रदेश स्तर पर भी उक्त वाइरस से ग्रसित जिलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है लेकिन पंचायत स्तरों पर जमकर शासकीय राशियों का अपनी निजी स्वार्थ साध रहे हैं।

आइए जानते हैं क्या है मामला-

शासन प्रशासन की महत्वपूर्ण योजना भागीरथी नल जल योजना व नल जल योजना जिसके तहत पूरे ग्राम पंचायत में हर गली मोहल्ले वालों तक पानी पहुंचाना रहता है लेकिन आज पर्यन्त तक पानी की एक बूंद भी किसी को नहीं मिला? ग्राम पंचायत स्तर पर स्ट्रीट लाइट का भी काम केवल खानापूर्ति कर दिया गया है? सड़क निर्माण कार्य को लेकर तो कुछ भी बोलने से ही डर लगता है?वर्तमान समय में शौचालय निर्माण कार्य की ही क्यों न हो? या फिर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत योजना का सुचारू रूप से संचालन का मामला ही क्यों न हो? मनरेगा योजना के तहत मजदूरों को काम से लेकर मजदूरी भुगतान की ही बात क्यों न हो? मूलभूत राशि का दुरुपयोग का ही क्यों न हो? मामला चाहे 14 वें व 15 वें वित्त की राशी का भी दुरूपयोग करने का क्यों न हो? चाहे सबसे बड़ा मामला वृक्षारोपण कार्य का ही क्यों न हो? नीस्तारी तालाबों को नियमों को ताक में रखकर ठेका देने का मामला ही क्यों न हो? ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों से लेकर पंचायत चपरासी की मानदेय का ही मामला क्यों न हो? अन्य मामलों को भी जानकर आश्चर्य होगा?                          

आइए नल जल योजना का हकीकत जानते हैं

वर्तमान समय में ग्राम पंचायत गोबरसिंहा में पूर्व से भूतपूर्व सरपंच के कार्यकाल में हुए भागीरथी नल जल योजना से लेकर नल जल योजना तक की सारी योजनाओं का लाभ इस ग्राम पंचायत गोबरसिंहा को मिला हुआ है लेकिन आज पर्यन्त तक पानी तो दूर की बात है यहां पर पाइप लाइनें भी बिछी हुई है लेकिन पानी आज तक भी नहीं पहुंची है इससे बड़ी क्या विडंबना है? फिर भी आज तक शासन प्रशासन इस मामले पर किसी भी तरह की कार्यवाही करने से कतराती हुई नजर आ रही है लेकिन उक्त मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के कारण ही उक्त ग्राम पंचायत के ग्रामीण इस मूलभूत सुविधा से वंचित रह गई है?

आइए ग्राम पंचायत स्तर पर स्ट्रीट लाइट की हकीकत जानते हैं

ग्राम पंचायत गोबरसिंहा मे वर्तमान सरपंच सचिव के द्वारा जो स्ट्रीट लाइट के रूप में बल्ब लगाई गई है उसमें जानकारी के हिसाब से एक साल की वारंटी है लेकिन आज के समय में खराब हुए बल्बों को नहीं बदला जा रहा है जो कि मूलभूत सुविधाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति कर लूट रहे हैं जो कि जांच का मामला है?                              

आइए जानते हैं सड़क निर्माण कार्य की हकीकत

वर्तमान सरपंच के कार्यकाल में छोटी छोटी रूप में सी सी रोड निर्माण कार्य किया गया है जो नियमानुसार केवल खानापूर्ति की गई है जिसकी गुणवत्ता जांच का मामला है क्योंकि कोर कटिंग के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है इसलिए यदि इस मामले पर शासन प्रशासन जांच एजेंसी गठित कर जांच कराई जायेगी तो मामला दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ जायेगा? जबकि इस ग्राम पंचायत में सड़क निर्माण कार्य किया ही नहीं गया है?
आइए जानते हैं शौचालय निर्माण कार्य की हकीकत

ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी अनुसार वर्तमान सरपंच के कार्यकाल में लगभग 54 हितग्राहियों का मूल्यांकन व सत्यापन किया गया है जिसमें से कुछ ही लोगों को भुगतान हुआ है लेकिन अगर नियमानुसार जॉच किया जायेगा तो भुगतान प्राप्त हितग्राहियों में से कई लोगों को पूर्व में भी शौचालय निर्माण की राशि प्राप्त हो चुकी है इसलिए इस मामले पर भी जॉच किया जाना उचित होगा?     

आइए जानते हैं प्रधानमंत्री आवास योजना की हकीकत

वर्तमान सरपंच के कार्यकाल में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों को लाभ देने के नाम पर केवल छलावा ही किया गया है क्योंकि जिन लोगों का नाम एसईसीसी सूची में नाम दर्ज नहीं है उनका भी दस्तावेज तैयार कर जमा करवा लिया गया है लेकिन उन सभी दस्तावेजों को भी जनपद पंचायत में जमा नहीं किया गया है बल्कि सरपंच महोदया जी अपने घर पर जो ऑफिस खोले हैं वहीं रद्दी की टोकरी में डाल रखे हैं ताकि लोगों का मन बहला फुसलाकर तरंगित व उल्लासित कर सकें जो कि जॉच का मामला है?
 
आइए जानते हैं केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना मनरेगा योजना की हकीकत

वर्तमान सरपंच के कार्यकाल में केंद्र सरकार द्वारा संचालित महत्वपूर्ण योजना महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना जो गरीबों के लिए अहम योगदान रहा है लेकिन ग्राम पंचायत गोबरसिंहा के सरपंच महोदया सचिव व रोजगार सहायक के द्वारा खोरीबैगीन तालाब गहरिकरण कार्य जो विगत वर्ष करवाया गया था जिसमें उक्त ग्राम पंचायत के मजदूरों ने अपने नवनिर्वाचित सरपंच महोदया के कार्य की सराहना करते हुए अपनी कमर कसकर अपने परिवार की भरण पोषण के लिए उक्त कार्यस्थल में शामिल होने चल पड़े लेकिन उन्हें इस बात की अंदेशा नहीं था कि जिसे हमने अपने ग्राम पंचायत के हित के लिए चुने हैं वहीं उनका थाली से निवाला छीन लेगा? लेकिन फिर भी मजदूरों में एक आश थी कि हमारी खून पसीने की कमाई को हमारे सरपंच महोदया जरूर दिलायेंगे? जब उक्त मामले में ग्रामीण मजदूरों को कुछ समय बाद पता चला कि हम जिन्हें भगवान का दर्जा दिए हैं वहीं आगे चलकर हमारे लिए राह का कांटा बनकर हमारे ही पैरों पर चुभेगा? क्योंकि काम हम मजदूरों ने किया है और भुगतान सरपंच महोदया, सचिव और रोजगार सहायक अपने घर परिवार व अपने निजी स्वार्थ के लिए हितैशी लोगों के नाम पर मास्टर रोल भरकर पैसा निकालने का काम करेंगे? कहने का मतलब पूरा मामला गबन का है जो कि जॉच का मामला है क्योंकि सरपंच महोदया व रोजगार सहायक ने अपनी रिश्तेदारी निभाने के चक्कर में शासन प्रशासन के सभी नियमों को दरकिनार करते हुए अपनी अपनी परिजनों को ही इस योजना का लाभ दिलाया है चाहे सरपंच महोदया अपने बच्चों के नाम पर हो चाहे अपने परिवार के नाम पर हो? इसी तरह रोजगार सहायक उनसे दो कदम आगे चलकर अपने माता पिता व दादाजी जो कि ढंग से चल भी नहीं पाते हैं के नाम पर फर्जी मास्टर रोल भरकर शासकीय राशियों का गबन किए हैं और तो और उक्त कार्य के दौरान रोजगार सहायक महोदया के माता पिता जो लॉकडाउन से पहले दूसरे राज्य में मजदूरी करने गए थे और उक्त कार्य संचालित था उसी समय वो लोग क्वारिनटीन सेंटर में थे तो फिर भी उनके नाम से फर्जी मास्टर रोल भरकर शासकीय राशियों का गबन किया गया है लेकिन आज पर्यन्त तक किसी भी तरह का कोई जांच नहीं हुई है जो कि एक प्रश्न चिन्ह है? जबकि वर्तमान समय में भी उक्त ग्राम पंचायत में टार तालाब गहरीकरण विगत माह से संचालित है लेकिन मजदूरों की संख्या महज 15 से 20 मजदूर ही मौजूद रहे हैं जो कि सोचनीय बात रही है इसलिए इस मामले में कार्य की धीमी गति को लेकर मुख्यकार्यपालन अधिकारी बरमकेला ने अपने दल बदल ले कर मौके पर पहुंचे थे और कार्यस्थल पर हकीकत देखकर ही आगबबूला हो गए और वहीं पर सरपंच पति व रोजगार सहायक को वहीं पर शख्त हिदायत देते हुए बोले कि कल यहां कम से कम 200 से लेकर 300 मजदूर उपस्थित होना चाहिए लेकिन सरपंच पति और रोजगार सहायक के कानों में जूं तक नहीं रेंगी और लगभग 8 लाख का कार्य दो से तीन सप्ताह में ही बंद हो गया? लेकिन आज पर्यन्त तक उक्त मामले में जनपद पंचायत बरमकेला की ओर से क्या कार्यवाही की गई जिसकी जानकारी न ही उक्त ग्राम पंचायत के ग्रामीणों को है और न ही किसी और को है? जो कि जॉच का विषय है


आइए जानते हैं मूलभूत राशि की हकीकत

उक्त ग्राम पंचायत में मूलभूत राशि की बात कही जाय तो सोने पे सुहागा है क्योंकि उक्त राशी को लेकर ग्राम पंचायत सरपंच सचिव ने दुनिया भर की सारी हदें लांघ चुके हैं क्योंकि उक्त राशियों का द सदूपयोग जितनी रूप में करना है उससे चार गुना बड़ा कर दुरुपयोग करते हुए उक्त राशी निकाला गया है जो जांच कराई जाने पर शासन प्रशासन को भी जानकर हैरानी होगी?

आइए जानते हैं 14 वें व 15 वें वित्त की राशी की हकीकत

इस मामले में तो उक्त ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव ने सारी हदें पार कर दी हैं क्योंकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की ओर से सबसे ज्यादा राशि ग्राम पंचायत के विकास के लिए उपलब्ध कराई जाती है लेकिन उक्त ग्राम पंचायत में सरपंच व सचिव द्वारा उक्त शासकीय राशि का दुरुपयोग करते हुए लगभग 85% राशियों का आहरण कर बंदरबांट किया जा चुका है क्योंकि उक्त ग्राम पंचायत में वर्तमान सरपंच के कार्यकाल में अभी तक जितने भी बिल वाउचर दिखाए जा रहे हैं उनमें सच्चाई 50-60% ही नजर आ रही है क्योंकि ग्राम पंचायत गोबरसिंहा में जितने भी मोटर पंप मरम्मत व सामग्री क्रय तथा बोर खनन दिखाए जा रहा है और उन सभी कार्यों पर व्यय राशि बताई जा रही है वह बिल्कुल भी खरा नहीं उतरती है क्योंकि उक्त ग्राम पंचायत में पेयजल व्यवस्था व अन्य मोटर पंप के मरम्मत कार्यों के लिए बिल वाउचर रिकॉर्ड में बताई जा रही है वह बिल्कुल संदेह के घेरे में है जो कि जांच का विषय है?                                      

आइए जानते हैं ग्राम पंचायत के नाली सफ़ाई की हकीकत

इस मामले में यह जानना बेहद जरूरी है की ग्राम पंचायत में नालियों का सही नाप किया जाए तो 500 मीटर से अधिक नहीं होगा उसी हिसाब से अंदाजा लगाया जा सकता है की वर्तमान सरपंच के कार्यकाल का लगभग 1 वर्ष ही बीता है और उन्होंने अभी तक एक ही बार नाली सफाई व मलवा धुलाई का कार्य करवाया है इसमें भी ग्रामीणों के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार लगभग 12 से 15 व्यक्ति ही कार्य किए है और उक्त नालियों से निकाले गए कचरे व मलबे एक ही ट्रैक्टर से धुलाई करवाया गया है जबकि ग्राम पंचायत सरपंच व सचिव के द्वारा लगभग पांच से छह व्यक्तियों के नाम पर मलवा धुलाई के नाम से भुगतान किया गया है जो कि पूर्णत:मिथया व साबित हो रहा है।

आइए जानते हैं वृक्षारोपण की हकीकत

उक्त मामले में वृक्षारोपण की ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी अनुसार मामला बहुत ही संदेहास्पद प्रतीत हो रही है क्योंकि वृक्षारोपण के नाम पर हकीकत जानने के लिए ग्रामीणों ने अपने अपने हिसाब से मुआयना किया तो वृक्षों की संख्या नहीं के बराबर थी जोकि मनरेगा के तहत लगभग 25% भुगतान मजदूरी के रूप में किया जा चुका है आखिर बिना वृक्ष लगाए किस लिए भुगतान की गई और किन-किन लोगों को भुगतान की गई यह भी जांच का विषय है।

आइए जानते हैं ग्राम पंचायत के नीस्तारी तालाबों की हकीकत

इस मामले में ग्राम पंचायत गोबरसिंहा के सरपंच पति ने अपनी चुनावी रणनीति को अमलीजामा पहनाते हुए अपने निजी व्यक्तियों को जो ग्राम के मुख्य निस्तारित तालाबों बावहन तलाब, पुरैनातराई तलाब कों नाम मात्र के समूह को मछली पालन करने के लिए व्यक्तिगत रूप से ठेका देने की बात सामने आया है इस मामले पर जब ग्राम पंचायत के कुछ जनप्रतिनिधियों से पता चला कि हमें भी नहीं पता है कि कब मुनादी किया गया और कब और किस समूह को ठेका दिया गया है और दो तीन दिन पहले एक मामला सामने आया था कि कुछ ग्रामीण मिलकर तालाब में मछली पकड़ने पहुंचे तो वहां मौजूद सरपंच पति के खास लोग वहां पहले से ही मौजूद थे और उक्त ग्रामीणों को बोला गया कि किसकी औकात है जो इस तालाब में मछली पकड़ने का साहस करेगा हमलोग देखते हैं तो ग्रामीणों ने अपनी बात रखी कि आप कौन होते हैं जो हम ग्रामीणों को मना कर रहे हैं तथा धमकी दे रहे हैं तो सरपंच पति के खास लोग बोले कि हम लोग यहां सरपंच के कहने पर ही 10 हजार रूपये का मछली बीज डाले हैं और आप लोग मछली पकड़ने पहुंचे हैं तो हम देखते रहेंगे। स्थिति गंभीर रूप ले चुका था और उसी समय पर सरपंच पति को कॉल किया गया तो उन्होंने भी कहा कि आपको अकेले मछली खाना है तो आप बाद में खा लेना लेकिन अभी मछली पकड़ने पहुंचे हैं उनको लेकर वापस ले जाइए और इस तरह मामले ने तुल पकड़ लिया था और यह सारा मामला सरपंच पति के जानकारी में थी लेकिन उन्होने उक्त घटनास्थल पर जाना नागवार गुजरा था।

वर्तमान सरपंच जबसे शपथ ग्रहण किए हैं, तबसे ही ग्राम पंचायत गोबरसिंहा के राजनैतिक पिच पर पहली ही गेंद पर सिक्सर किंग की तरह चौके छक्के लगाने लगे हैं लेकिन राजनीति की इस पिच पर शानदार बल्लेबाजी करते हुए अपनी साख जमा लिया परन्तु इस एक वर्षीय खेली गई पारी में यह भूल गए कि मैच जीतने के लिए दो बल्लेबाज ही काफी नहीं है क्योंकि मैच सम्पन्न कराने के लिए 11 खिलाड़ियों सहित दो अंपायरों की भी जरूरत होती है और इसी कारण दर्शक वर्ग को यह केवल दिखावा भरी पारी से ही मैच जीतने वाले नहीं हैं बल्कि अपने निजी खेली पारी से बने स्कोर को बचाना भी होगा तब कहीं जाकर मैच का परिणाम उनके हक में आयेगा लेकिन ये तो आने वाले राउंड में ही पता चल पायेगा की इनकी बल्लेबाजी का जौहर फाइनल मैच तक बरकरार रखने में सफल हो पाते हैं कि बीच में ही मैच हारकर बाहर निकल जायेंगे?                          

 आइए जानते हैं पंचायत प्रतिनिधियों व चपरासी की मानदेय की हकीकत.................

वर्तमान समय में प्रत्येक बैठक में शामिल होने वाले सभी पंचों को शासन मानदेय राशी का भी प्रावधान किया गया है लेकिन इस मामले में भी सच्चाई से कोसों दूर नजर आ रहे हैं और एक खास बात जानने को मिला है कि ग्राम पंचायत गोबरसिंहा में विगत कई वर्षों से कार्यरत रहे चपरासी को वर्तमान सरपंच ने परिवर्तित करते हुए चपरासी विहीन कार्यकाल चला रहे हैं तो पूर्व चपरासी का भुगतान तो कर देते लेकिन यहां भी मामला देखने लायक है जबकि रिकॉर्ड में दर्ज है कि चपरासी को मानदेय देने के लिए राशी आहरित किया गया है लेकिन पीड़ित चपरासी को मानदेय अप्राप्त है ऐसा क्यों?       बहरहाल अब यह जानना बेहद ही दिलचस्प होगा कि इतनी बड़ी मात्रा में शासकीय राशियों का आहरण कर गबन किया गया है उसके लिए शासन प्रशासन जांच एजेंसी गठित कर जांच कराई जायेगी या फिर अन्य मामलों की तरह इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जायेगा? लेकिन यदि इस मामले पर जॉच किया जायेगा तो कितने सारे घोटालों का मामला सामने आयेगा यह तो उच्च स्तर के पदाधिकारियों के विवेक पर निर्भर करती है?


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