रायगढ़ का विकास या ग्रामीणों के जीवन का विनाश..टीआरएन एनर्जी ... - CG Sandesh

रायगढ़ का विकास या ग्रामीणों के जीवन का विनाश..टीआरएन एनर्जी के उड़ते फ्लाई ऐश से ग्रामीणों का जीवन हो रहा बेहाल..!

औद्योगिक जिला रायगढ़ विकास की ओर तो अग्रसर तो है ही वहीं विनाश के पथ से भी अछुता नहीं है। जहां उद्योगों के रवैया और उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण से लोग प्रभावित और परेशान रहते हैं। एक कोरोना महामारी आफत मचा रखी है और दूसरी तरफ हवाओं में घुलता फ्लाई ऐश जैसा धीमा जहर लोगों की जान का दुश्मन बना बैठा है। गर्मियों में दुर्दशा और भी गंभीर हो जाती है जब तेज हवाओं के साथ यह उड़ती हुई हमारी सांस के रास्ते शरीर में प्रवेश करती है। मानो जैसे पूछती हो जैसे कोरोना से मरना पसंद करेंगे या राखड़ से..??
ताजा मामला जिसमे घरघोड़ा ब्लॉक स्थित टी आर एन एनर्जी के प्रदूषण से ग्रामीण परेशान हैं। कंपनी द्वारा फ्लाईएस खेत-खलियान, बंजर जमीन कहीं भी फेंक दिया जा रहा है। जिससे काफी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। बढती गर्मी और तेज हवा के बहाव से राखड़ उडने लगती है। जिससे बिलासखार, राबो, टेण्डा नावापारा, भेंगारी, छोटे गू्मडा, बडे गुमडा, खोखरोअमा गांव के राहगीर और ग्रामीण परेशान हैं।

ऐसा नहीं है किसके बारे में लोग आवाज नहीं उठाते हैं शिकायत ज्ञापन से भी जब काम नहीं बनता, तो लोग सोशल मीडिया में अपनी बात खुल कर रखते हैं। हाल ही में जन चेतना मंच के रमेश अग्रवाल ने वहां की दुर्दशा बताते हुए अपने फेसबुक के जरिए से TRN एनर्जी की देख से उड़ते फ्लाई एस की एक वीडियो साझा की है, जो अपने आप में ही सब कुछ बताती है।

2019 में वन भूमि पर फ्लाई एस राख फेंकनें को लेकर अखबारों व ग्रामीणों की शिकायत पर पर्यावरण विभाग ने उद्योग प्रबंधन के खिलाफ कार्यवाही की थी। लेकिन उस समय महज खानापूर्ति हुई दिखाई दी और सभी बातों को निराधार बताते हुए उद्योग को क्लीन चिट दे दी गई। लेकिन धरातल पर देखा जाए आज भी उद्योग प्रबंधन खुले में फ्लाई एस फेंक रहा है। जो गर्मी की गर्म हवाओं के साथ लोगों के घरों में सांसो में घुस रहा है। जब कभी बात इस प्रकार समाचार पत्रों मीडिया और अन्य माध्यम से सुर्खियों में आती है तो लगता है कि पर्यावरण विभाग की चांदी हो जाती है। नोटिस-नोटिस खेला जाता है, अपने कुछ खास शागिर्दों के साथ मिलकर चुपचाप पंचनामा बनाया जाता है। ज्यादातर मामलों में कागज का गुलाबी रंग इस काली डस्ट को क्लीन चीट में बदल देता है। कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, बोलने वाले चिल्ला चिल्ला कर थक जाते हैं और सब कुछ ऐसा ही चलता रहता है।

सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी के अनुसार-

“जिस आधार पर रायगढ़ जिले में उद्योगों को पर्यावरण स्वीकृती मिली है। कोई भी उद्योग उनका पालन नहीं करती। जिससे आए दिन स्थानीय ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पडता है चाहे वो एस डाईक वाले क्षेत्र हो या बगैर एस डाईक वाले। कोई भी कहीं भी डस्ट फेंक देते हैं न तो उद्योगों में मानिटरिंग सिस्टम लगी है। जिससे वायु की शुद्धता परखी जा सके। सरकार को उद्योगों पर कडाई करते हुए मानिटरिंग सिस्टम लगवाना चाहिए और उसे डिस्प्ले करे.”

हाल में ही तमनार ब्लॉक के दर्जन भर गांव के ग्रामीण जिंदल उद्योग से निकलने वाली फ्लाई एस से ग्रामीण परेशानी का सामना कर रहे हैं। वही तमनार बीडीसी ने भी उद्योग की मनमानी रवैया और प्रदूषण के खिलाफ रायगढ़ कलेक्टर व पर्यावरण विभाग में ज्ञापन सौंपा हैं। डिजिटल मीडिया से लेकर प्रिंट मीडिया तक 3 दिन तक लगातार या मामला सुर्खियों में रहा। नतीजा यह हुआ कि यहां पर्यावरण विभाग के अधिकारी जांच के लिए आए हुए थे। वहां क्या हुआ अभी इस बात की जानकारी तो नहीं मिली। मगर इस बार कुछ अप्रत्याशित होगा? इस बात की भी किसी को उम्मीद नहीं है, होगा वही जो होता आया है! सब जानते हैं कि गुलाबी रंग में इतनी ताकत है कि वह हर काले को सफेद बना सकता है।


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