मूलभूत विकास और सर्वांगीण विकास के लिए तरसता ग्रामपंचायत गहन... - CG Sandesh

मूलभूत विकास और सर्वांगीण विकास के लिए तरसता ग्रामपंचायत गहनाझरिया...

लैलूँगा विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाला ग्राम-पंचायत गहनाझरिया है उक्त ग्राम-पंचायत में 4 आश्रित ग्राम सूकबास,छपरपानी,बरखोरिया और भैंसबुड़ी हैं। विदित हो कि गहनाझरिया मूल ग्राम से उक्त चारों ग्राम की दूरी एक से 7 किलोमीटर से अधिक है तथा प्रत्येक ग्राम की जनसंख्या 1000 करीब है। चारों आश्रित गाँव को प्रत्येक कार्य हेतु दूरदराज से मूल ग्राम गहनाझरिया आना पड़ता है जिससे आश्रित ग्राम के महिला,बच्चों और बुजुर्गों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

तहसीलदार, विधायक, संसदीय सचिव से विनती कर थक गए ग्रामवासी-

आजादी के बाद से दर्जनों बार अपनी समस्या और राजस्व ग्राम घोषित की मांग को लेकर समस्त ग्रामवासी तहसीलदार, स्थानीय विधायक से मांग कर थक गए हैं। संसदीय सचिव और कलेक्टर महोदय को भी अपनी समस्याओं से मौखिक और लिखित संवैधानिक तौर पे अर्जी दी गयी है लेकिन अभी तक उम्मीद की रौशनी लौकिक नही हो पाई है।

स्थानीय नेता प्रत्येक चुनाव में पकड़ाते है आश्वाशन का झुनझुना-

जैसे ही चुनाव आता है नेताजी गांव के भोले-भाले ग्रामीणों को मुख्य रूप से चुनावी वादा करते हैं कि हमारे 5 साल के कार्यकाल में जरूर राजस्व ग्राम घोषित करूँगा। लेकिन जैसे चुनाव ख़तम,रिश्ता ख़तम। और ये किसी एक नेता द्वारा नही है कि ग्रामीणों को ठगा गया हो यह रीत तो आजादी से आज तक चली आ रही है। और प्रत्येक चुनाव में बदलते हैं तो प्रत्यासी या पार्टी लेकिन नही बदली तो आजतक ग्राम-पंचायत गहनाझरिया की समस्या।

हाईस्कूल और पक्की सड़क विहीन क्षेत्रफल में बड़ा पँचायत-

कहने को गहनाझरिया पँचायत लैलूँगा विकासखण्ड के बड़े पंचायतों में एक है परन्तु भौतिक स्तर पर न तो वहाँ हाईस्कूल है न ही पक्की सड़क और न ही सीसी रोड़। एक ग्राम से पँचायत की दूरी तो लगभग 5 किलोमीटर है तो ऐसे में इनकी होने वाली समस्याओं को सिर्फ महसूस किया जा सकता है। परंतु महिला, बुजुर्ग और बच्चे तो प्रतिदिन इन समस्याओं से गुजर रहे हैं।

मुख्यमंत्री हैं उम्मीद की किरण-

आजादी के बाद से छलावा हो रहे इस ग्राम-पंचायत में स्थानीय नेताओं से उम्मीद की किरण दिखाई न देने पर अब पँचायत और ग्रामवासियों को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ही एक मात्र सहारा दिख रहे हैं। जिसके लिए उन्होंने बकायदा ग्रामसभा से अनुमोदन कराकर तहसीलदार, विधायक,कलेक्टर,संसदीय सचिव के ज्ञापन सहित लिखित में अपनी समस्याओं और मांगो को रखा है।

मीडिया बने हमारी आवाज़ तभी होगा समस्या का निदान-जशोमती पैंकरा

सरपंच जशोमती पैंकरा और पंचायत सदस्यों द्वारा अपनी मांगों को नेता,अधिकारियों तक रखकर,बैठक आहूत करने के पश्चात अब सरपँच ने जिले एवं प्रदेश के मीडिया से अपील की है की वो पँचायतवासियों की आवाज़ बन कर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को होने वाली समस्याओं का समाधान हो सके।


अन्य सम्बंधित खबरें