सारंगढ़वासियों से ख़ौफ़ खाता कोरोना...!घुटने बल बैठ कर गिड़गिड़ाने लगा वायरस..विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जताया आश्चर्य...
एक वायरस जिसने पूरे विश्व को घुटने में ला दिया गलियों और शहर को वीरान कर दिया, बड़े से बड़े अमीर औऱ ताकतवर व्यक्ति भी खुद को चार-दीवारी में समेट कर अपने और अपने परिवारवालों के जान बचाने की कोशिश में लगे हैं। पूरा विश्व जिस बीमारी से बचने के लिए दिन-रात लगे हैं इस बीमारी की कोई बिसात सारंगढिया लोगों के सामने नही है। सरंगढ़वासी की बहादुरी की किस्से सुनकर अमेरिका भी अपने प्रतिनिधि भेजने को उत्सुक हैं, गुप्त सूत्रों से पता चला है कि राष्ट्रपति बाइडेन की भी दिली इच्छा एक बार सारंगढ़वासियों के दर्शन करने को हो रही है।
बात अटपटा जरूर है लेकिन है सौ टका सच जिस तरह छत्तीसगढ़ में और जिले में कोरोना दूसरे चरण में विकराल रूप धर कर आक्रमण किया है और अधिक ख़तरनाक और जानलेवा हो गया है। एक तरफ भारत रत्न सचिन तेंदुलकर भी इससे बच नही सके तो आम आदमी की बात छोड़िए। सचिन की बात तो दूर प्रदेश में दुर्ग, रायपुर के जो हालात हैं बुद्धिजीवियों के माथे पर बल देने के लिए काफी हैं। लेकिन मजाल है सारंगढिया लोग को इससे कोई फर्क पड़े।
चाहे सब्जी मार्केट हो या तहसील कार्यालय या कोई अन्य भीड़भाड़ वाली जगह मजाल है कि सारंगढिया कोविड नियमो का पालन करते दिखे..दुकानों की हालत या अन्य सार्वजनिक जगह लोग तो ऐसे नियमो की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं मानो कोरोना कोई शर्दी-बुखार से ज्यादा वैल्यू रखता है नही हो। शराब दुकान और ढ़ाबा में तो सारंगढिया लोग ने एक लक्ष्मण रेखा सी खींच दी है जिसके 100 मीटर के दायरे में आकर कोरोना खुद भस्म हो जाता है। न जाने सारंगढ़वासियों की ये टेक्निक दारू भट्टी के किस कर्मचारी ने लीक कर दी है जो आज पूरे प्रदेश के शराब दुकानों तक पहुंच गई है इस कारण पूरे प्रदेश के शराब भट्ठी में यह लक्ष्मण रेखा खींची जा चुकी है।
जो व्यक्ति इस घेरे के अंदर रहता है उसे कोरोना छू नही पाती। वो तो शुक्र है कि हमारे स्कूल कॉलेज को सरकार ने जबरजस्ती बन्द करवा दिया वरना मजाल है हम इसमे भी कोविड-19 नियमो का पालन करते। सैलून वालो ने तो कोरोना को खुलेआम चुनौती दे डाली है एक टॉवेल में बिना हैंडवाश,सेनिटाइजर और सफाई किये दिन में सैकड़ों ग्राहकों को प्रतिदिन सेविंग कटिंग कर रहे हैं लेकिन कोरोना वायरस में उतना दम नही की सेलूनकर्मी को चूं तक कर सके।
पुलिसकर्मियों द्वारा समझाईश और 100 रुपये अर्थदंड से सारंगढिया सुधर जाये वो सारंगढिया ही क्या...!
इतने खुलेआम चुनौती देते सारंगढ़वासियों से भी अभी प्रकोप प्रतिदिन 100 का आंकड़ा छू नही पा रहा है गम्भीर विषय है। इनके इन्ही प्रतापी कार्यों का जायजा लेने विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने प्रतिनिधि भेजने की इच्छा ज़ाहिर की है और पुलिस और स्वस्थ्यकर्मीयों ने सारंगढ़वासियों के नाम वीरता चक्र प्रदान करने भारत सरकार से अनुरोध किया है।
(व्यंग्य बाण-जगन्नाथ बैरागी)