कोरोना से जंग हार गये कांग्रेस के अपराजेय योद्धा विजय बसंत..
कहा जाता है राजनीति में कोई किसी का सगा नही होता लेकिन जिसकी कदर और सम्मान विपक्षी पार्टी भी करे उसकी लोकप्रियता का आलम क्या होगा सहज ही समझा जा सकता है। ऐसे ही मिलनसार, गरीबो के हमदर्द और कांग्रेस के कद्दावर नेता थे विजय बसंत।
अंचल में कहावत था विजय बसंत की लोकप्रियता इस कदर थी कि लोग उन्हें व्यक्तिगत सम्बंध के आधार पर वोट देते थे। आगामी समय मे सबसे बड़े नेता बनकर राजनीतिक आसमान में छाने की तमन्ना लिए किसी को तनिक भी इल्म नही था कि ये सितारा कोरोना के काल के गाल में समा जायेगा और सभी सारंगढ़ वासियों को दुख के सागर में डूबता छोड़ जाएगा।
जिला पंचायत सदस्य तुलसी बसंत के पति, मंडी अध्यक्ष,जिला कॉंग्रेस पदाधिकारी के अलावा विजय बसंत की पहचान एक दयालु, परोपकारी, जनता से रिश्ता रखने वाले नेताओं में होती थी। एक ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे जिन्हें सरकारी कर्मचारी से लेकर पत्रकार जगत तक इज़्ज़त करते थे। अगर यूं कहें कि विजय बसंत जैसे नेता पूरे जिले में गिनती मात्र के हैं तो अतिसंयोक्ति नही होगी।
अपने जीवन काल मे अपराजेय रहने वाले विजय बसंत को कोरोना ने हरा दिया..!
शारीरिक तकलीफ होने पर उन्होंने जिम्मेदार नागरिक होने के नाते कोविड-19 का टेस्ट कराया जिसपर रिपोर्ट पॉजिटिव आयी। सांस लेने में दिक्कत होने पर रायगढ़ में इलाज़ करा रहे थे, सुधार न होता देख उन्हें रामकृष्ण हॉस्पिटल रायपुर रेफर किया गया था जहाँ करीब 8.30 रात्रि को उनकी कोरोना से जंग हार जाने की खबर आयी।
जैसे ही उनकी मृत्यु की खबर आयी पल भर में ये बात पूरे जिले में फैल गयी एकबारगी तो किसी को यकीन ही नही हुवा, लेकिन जब सत्यता से सामना हुवा तो सभी ने अपने मोबाईल स्टेटस के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की। सारंगढ में चाहे युवा हों,या बुजुर्ग,कांग्रेस,भाजपा,या बहुजन समाज पार्टी,कर्मचारी,या पत्रकार सभी ने अपने कोरोनकाल में स्टेटस रखकर विजय बसन्त को अश्रुपूरित श्रधांजलि अर्पित की... इसी से आप विजय बसन्त की लोकप्रियता का अंदाजा लगा सकते हैं।