"कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के न घर आये"....बुर्कापाल हमले की चौथी बरसी विशेष...
वैसे तो हमारे प्रदेश में नक्सलियों के द्वारा अब तक ऐसी दर्जनों घटनाओ को अंजाम दिया गया है। जिनमे सैकड़ों जवानोँ की शहादत हो चुकी है।
इन घटनाओ मे से एक बेहद दर्दनाक घटना आज ही दिन 25 अप्रैल 2017 को सुकमा जिले के बुर्कापाल गांव में घटित हुई थी। जिसमें पहले से ही घात लगाकर बैठे करीब 300 नक्सलियों ने पेट्रोलिंग पर निकले 90 सी आर पी एफ के जवानोँ पर तब कायरतापूर्ण हमला किया था,जब वे कई किलोमीटर की पैट्रोलिंग के बाद दोपहर में खाना खाने बैठे थे।
इस हमले में माओवादियों ने 25 जवानो की हत्या कर दी थी। आज इस घटना की आज चौथी बरसी है। सरकार के तमाम दावों के बाद भी आज भी बस्तर में हालात कमोबेश वैसे ही बने हुए है। सत्ता तो जरूर बदली पर न तो सरकारी नक्सल नीतियां बदली,न ही इस हमले के बाद बल के युद्धक क्षमता के इस्तेमाल को लेकर कोई ठोस योजना बनाई गई।।
परिणाम बुर्कापाल हमले के बाद अब तक प्रदेश में 20 अन्य छोटे-बड़े नक्सली हमले हो चुके हैं।। जिंसमे बीजापुर का हालिया तररेम हमला भी शामिल है। जिसमें 22 सुरक्षाबल के जवान शहीद हुए हैं।
हालांकि ऐसे तमाम हमलों में सुरक्षा बल के जवानों के अलावा कुछ जनप्रतिनिधि और ग्रामीण भी बड़ी संख्या में मारे गए हैं। विडम्बना देखिये प्रत्येक घटना के बाद बासागुड़ा की तरह सरकारी निंदाक्रम के बाद श्रद्धाजंलि सभाएं आयोजित होती रही हैं।। फिर सब कुछ वापस अपने पुराने ढर्रे पर चलने लगता है।।
इसके पीछे कि एकमात्र वजह जो मेरे समझ मे आती है,वो ये है कि आमतौर पर सुरक्षाबल और माओवादी हिंसा में मरने वाले दोनों तरफ के लोगों का देश के उस मेहनतकश सर्वहारा वर्ग से जुड़ा होना है,जिनके जीने या मरने से बहुत ज्यादा प्रभाव सत्ता और सिस्टम पर नही पड़ता है।अन्यथा इतनी विभत्स हत्याओं को देखकर तो पत्थर की आत्मा भी चीत्कार उठती।।
खैर हालात जैसे भी हो,हमें अपने व्यस्ततम समय में से थोड़ा वक्त निकालकर,हमारी सुख,-शांति और खुशहाली के लिये अपना सर्वोत्तम बलिदान देने वाले उन 25 धुरंधर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहिए,जिन्होंने माओवादी हिंसा के विरुद्ध संघर्ष कर अपने शौर्य का सर्वोच्च प्रदर्शन करते हुए अपनी आत्माहुति दी थी।
बुर्कापाल हमले में शहीद जवानों की सूची इस प्रकार थी -----
शहीद - इंस्पेक्टर रघुवीर सिंह। सब इंस्पेक्टर केके दास, एएसआई - संजय कुमार, रामेश्वर लाल व नरेश कुमार। हेड कांस्टेबल - सुरेंद्र कुमार, बाना राम, एलपी सिंह, नरेश यादव व पद्मनाभन। कांस्टेबल - सौरभ कुमार,अभय मिश्रा, बनमाली राम, एनपी सोनकर, केके पांडेय, विनय चंद्र बर्मन, पी. अलगुपंडी,अभय कुमार, एन. सैंथिल कुमार, एन. थिरूमुरुगन, रंजीत कुमार, आशीष सिंह, मनोज कुमार, अनूप कर्माकर(ये सभी मौके पर शहीद हुए।)हेड कांस्टेबल राम मेहर रायपुर लाने के बाद शहीद हुए।
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बुर्कापाल के शहीदों को नमन--
"कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के न घर आये" .
