कृषि दुकानों के न खुलने से किसान परेशान... प्लेट में महंगी हो सकती है सब्जियां...!
कोरोना वैश्विक महामारी का दुष्प्रभाव हर आम वो खास पर पड़ा है। लोग इससे उबरने की कोशिश भी कर रहे। कितु किसानों की समस्यायों का अंत नहीं है। खासकर वैसे किसान जो मौसमी सब्जी की खेती करते हैं ।
भारत में सब्जी किसान पहले ही मौसम की मार से परेशान था, और जो बचा था वो लॉकडाउन में चला गया। विश्व में फल और सब्जी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश अपनी खराब सप्लाई चेन, ट्रांसपोटेशन और कोल्ट स्टोरेज की पर्याप्त व्वयस्था न होने से हर साल करीब 13,300 करोड़ रुपए के उत्पादन बर्बाद कर देता है।" परन्तु इस बार गिनती और आगे तक जाएगी।
रायगढ़ जिले के सब्जी किसानों पर लॉकडाउन की मार-
जिले के आम जनमानस हेतु मुख्य आहार चावल, दाल, सब्जी है। एक तरफ जनता के थाली में सब्जी की कमी खल रही है दूसरी तरफ सब्जी उत्पादक किसान की सब्जियां बाड़ी और घर मे सड़ने के कगार पर हैं। वो तो शुक्र है कलेक्टर भीमसिंह का जिन्होंने दैनिक उपभोग की विशेष वस्तु सब्जियों के क्रय-विक्रय हेतु समय का निर्धारण कर दिया है, जिससे उत्पादक और उपभोक्ता दोनों को कुछ राहत मिलने की संभावना है।
भविष्य में सब्जियों के दाम बढ़ने की आशंका-
जिस तरह से प्रत्येक परिवार के रसोई की रानी अर्थात सब्जियों की महत्ता बढ़ती जा रही है। कोरोनकाल में डॉक्टर भी इम्यूनिटी बढाने हेतु हरी सब्जियों के उपभोग की बात कह रहे हैं, जिससे लोगों की रूचि दिन-ब-दिन हरी सब्जियों की ओर बढ़ने लगी है। परंतु सब्जी उत्पादक किसानों की समस्या से सभी अनजान हैं, जिससे भविष्य में सब्जी की कीमतों में उछाल से इनकार नही किया जा सकता।
क्या कहते हैं सारंगढ़ के सब्जी उत्पादक किसान-
जब इस बारे में सारंगढ़ के सब्जी उत्पादक किसानों से बात की गयी तो उनका कहना है कि हम ग्रीष्म ऋतु में धान के बदले सब्जी,दलहन,तिलहन की खेती की ओर आकर्षित हुवे थे। लेकिन इस महामारी ने छोटे किसानों की कमर तोड़ दी है। धनिया की कीमत तो 5 रुपये किलो थोक के भाव मे जा रहा है, बाकी सब्जियों का भी वही हाल है। परंतु अब सब्जी मंडी खुलने की खबर ने कुछ तो राहत पहुंचाई है। परंतु वर्तमान में न तो खाद,बीज न ही कीटनाशक दुकान खुल रहे हैं जिससे फसल उत्पादन एवं रोग कीटों से सुरक्षा हेतु किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है जिससे फसलों के उत्पादन और मूल्य में अंतर पड़ना स्वाभाविक है। अतः प्रशासन से अपील है कि सीमित समय तक ही सही कृषि दुकानों को खोलने की अनुमति प्रदान करें, ताकि हम किसान आसानी से सब्जी उत्पादन कर सकें जिससे जिलेवासियों को उचित मूल्य में सब्जी-भाजी उपलब्ध हो सके।
क्या कहते हैं कृषि अधिकारी डी एस तोमर-
अनुविभागीय कृषि अधिकारी डी एस तोमर से जब किसानों की समस्या को लेकर बात की गयी तो उनका कहना है कि वर्तमान में सब्जी के साथ मक्का,मूंगफली और जायद की फसलों में बीमारी और पतंगों का आक्रमण होता है। सही उत्पादन के लिए खाद,उर्वरक की भी आवश्यता होती है। किसान छोटे स्तर पर सब्जी की खेती करते हैं और इसलिए वो खाद,बीज,कीटनाशक इत्यादि का पूर्व प्रबंध नही रखते हैं, जिससे उनकी चिंता जायज है। इस वैश्विक महामारी में अन्नदाता ही हैं जिनके बदौलत सभी तक साग-भाजी पहुंच रही है। कृषि विभाग हमेशा किसानों के साथ है परन्तु, कृषि दुकानों के न खुलने से किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिससे उत्पादन में अंतर पड़ने की संभावना से इनकार नही किया जा सकता।