मेडिकल दुकानों में ऑक्सीमीटर की कालाबाज़ारी पर प्रशासन हुवा सख्त.. शहर के नामी दुकानदार पर कार्यवाही...
जिलें में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे ऑक्सीमीटर की खरीदी बिक्री भी बड़े पैमाने पर की जा रही है। शहर की कई मेडिकल दुकानों में ऑक्सीमीटर के अलग-अलग रेट है। जिला प्रशासन को कई दवाई दुकानों पर इसकी कालाबाजारी की शिकायते लगातार मिल रही थी। लगातार मिल रही शिकायत पर जिला कलेक्टर ने वर्चुअल मीटिंग में राजस्व विभाग को मेडिकल स्टोर में मिलने वाले ऑक्सीमीटर जां कीमत के आदेश दिए थे।
जिला कलेक्टर के आदेश के बाद रायगढ़ तहसीलदार सीमा पात्रे, नायब तहसीलदार श्रुति शर्मा, डीएसपी अंजू कुमारी ड्रग इंस्पेक्टर और राजस्व अमले व पुलिसकर्मियों के साथ शहर के मेडिकल दुकानों में पहुंचे। जहा पटवारियों को अलग अलग मेडिकल दुकानों में ऑक्सीमीटर खरीदने भेजा गया।बताना चाहेंगे कि मेडिकल स्टोर में मिलने वाले ऑक्सीमीटर का वह बिल जो होलसेलर को देना होता है। वह बिल भी दीपक मेडिकल स्टोर में नही था। जिससे यह भी पता नही लग सका कि होलसेलर ने ऑक्सीमीटर को किस रेट में मेडिकल स्टोर को दिया है..?
बहरहाल जिला प्रशासन हर हाल में आम जनता को किसी तरह की कोई दिक्क्क्त नहीं
होने देना चाहता है। इस वजह से ही ऑक्सीमीटरबके रेत पर नियंत्रण रखना
जरूरी भी है। दीपक मेडिकल में प्रशासनिक अमले की कार्यवाही की खबर पाते ही
मेडिकल शॉप एसोशिएशन के अध्यक्ष अजय अग्रवाल भी पहुंचे। उन्होंने तहसीलदार
को जानकारी देते हुए बताया कि ऑक्सीमीटर के होलसेल दामों में लगातार इजाफा
हो रहा है। ऐसे में दुकानदारों को जिस रेट में उपलब्ध हो रहा हैं, वह उसी
हिसाब से जरूरतमंद लोगों को बिक्री कर रहे है।
वजह चाहे जो भी हो
यही एक ही कम्पनी का ऑक्सीमीटर अलग अलग मेडिकल स्टोर में अलग अलग दामों पर
बेचा जाएगा तो कार्यवाही तो होनी ही चाहिए! आखिर क्यों दुकानदार के पास
होलसेलर का बिल नहीं था..? ऐसे समय मे जब हर तरफ कोविड रिलेटेड दवाइया या
संसाधनों की मांग है। ऐसे में रेट में अंतर होना, इस बात की ओर इशारा करता
है कि आपदा में अवसर खोजने में कुछ मेडिकल स्टोर भी पीछे नहीं है।