आक्सीजनदाताओं की अनवरत हत्या पर शुभचिंतक बने मूक दर्शक...विकास के नाम पर मनमानी का आरोप...
बरमकेला। छत्तीसगढ़ रायगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत संडा में ग्रामीणों ने आरोप लगाते शिकायत की है कि विकास के बहाने वर्षों पुराने हरे भरे पेड़ों को काटा जा रहा है। निजी स्वार्थ के कारण सरपंच सचिव ने अनुमति लेना भी उचित नहीं समझा और सैकड़ों पेड़ों की बलि चढ़ा दी। यह मामला बरमकेला ब्लॉक मुख्यालय से सटे ग्राम पंचायत संडा का है। उसके बाद भी जिम्मेदार मौन हैं। टार तालाब के मेड़ में 30-40 साल पहले से कई प्रजाति के पेड़ लगाए गए थे। नीम, बबुल, आम, सरसींवा आदि पेड़ को सिर्फ यह कहकर सरपंच सचिव ने काट डाला कि विकास में आड़े आ रहे हैं। उसके लिए फारेस्ट या जनपद पंचायत से अनुमति लेना
भी उचित नहीं समझा। पेड़ों को काटने से पहले ग्राम पंचायत में पँचायत प्रतिनिधियों की बैठक आहूत की और पंच, सरपंच ने मिलकर चुपचाप प्रस्ताव पारित कर दिया जिससे कानों कान किसी को इसकी खबर तक नहीं लगी। आरी लेकर जब तालाब मेड़ पहुंचे, तो कुछ ग्रामीणों को पता चला। देखते ही देखते बड़े पैमाने पर पेड़ गिरा दिया गया। कुछ ग्रामीणों ने आपत्ति जताई, मगर सरपंच ने एक नहीं सुना और पेड़ों की कटाई अनवरत जारी रखी।
विकास की भेंट चढ़ रहे ऑक्सीजनदाता--
ग्रामीणों का आरोप है, सरपंच न जाने क्यों सालों पुराने वृक्षों को काटने पर तुला हुआ है। टार तालाब के मेड़ की सफाई कर रोजगार गारंटी के तहत सड़क बनाने की योजना सरपंच की है। जिससे विकास के बहाने सैकडों पेड़ काटकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा सके। इसी वजह से अनुमति भी नहीं लिया गया है। फिलहाल ग्रामीणों ने पेड़ों की अवैध कटाई मामले में सरपंच सचिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
कोरोना महामारी से भी नही मिला सबक..
कोरोना महामारी के दुष्परिणाम ने लोगों को सोचने समझने पर मजबूर कर दिया है। महामारी से ग्रसित लोग एक एक सांस के लिए तरस रहे हैं। सब तरफ ऑक्सीजन को लेकर मारामारी की स्थिति है। ऑक्सीजन के बिना लोगों की सांसें थम जा रही है। ऑक्सीजन लेबल मेंटेन न हो पाने के पीछे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को प्रमुख कारण माना जा रहा है। उसके बाद भी सम्हलने के बजाए लोग इस आपदा में अवसर तलास रहे हैं। ऐसा संडा के लोग कह रहे हैं। सीईओ जनपद पंचायत नीलाराम पटेल के मुताबिक पेड़ों को काटने उनसे किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई है।
पर्यावरणविदों की चुप्पी समझ से परे–
हैरानी की बात यह है कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई संस्थाएं विशेष अभियान चला रही हैं। लोगों को पौधा लगाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। तो दूसरी ओर प्रशासन से बगैर परमिशन पेड़ काटे जा रहे हैं। हरियर छत्तीसगढ़ की कल्पना को साकार करने हर साल लाखों करोड़ों रुपए खर्च हो रहा है। वहीं कुछ लोग निज स्वार्थ के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह विरोधाभास लोगों की समझ से परे है। पर्यावरण प्रेमियों को भी यह नजर नहीं आ रहा है।
जनपद से कोई अनुमति नही लिया गया-
पेड़ काटने के लिए अनुमति लेना जरूरी है। हमारे जनपद से कोई परमिशन नहीं लिया गया है।
नीलराम पटेल, सीईओ जनपद पंचायत बरमकेला
तहसीलदार ने साधी चुप्पी.
इस संबंध में तहसीलदार अनुज पटेल से जानकारी लेनी चाही, उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया।