गरियाबंद का ऐसा गांव जहां कभी नहीं होती पानी की समस्या, सालो... - CG Sandesh

गरियाबंद का ऐसा गांव जहां कभी नहीं होती पानी की समस्या, सालों पहले बने तालाबों का सुख आज भी ग्रामीण भोग रहे, खेती-बाड़ी करके भी लोग हो रहे आत्मनिर्भर जिले के 12 एकड़ में फैला दियान तालाब में इन गर्मी के दिनों में भी लबालब पानी भरा हुआ है।

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में एक ऐसा गांव है जहां के ग्रामीणों को कभी जलसंकट का सामना नहीं करना पड़ता है। पूरा प्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है, आम तौर पर इन दिनों ज्यादातर गांव ऐसे हैं जहां लोगों को प्यास बुझाने और निस्तारी के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। पर जिले के देवभोग ब्लॉक का सबसे बड़े गांव सिनापाली की तस्वीर ही जुदा है। इसका सबसे कारण है 18वीं सदी में पूर्वजों का वाटर मैनेजमेंट सिस्टम, जो अब भी पूरी कारगर है। इतना ही नहीं इसी सिस्टम के चलते यहां के 40 परिवार ऐसे हैं,जो 60 हेक्टेयर से भी ज्यादा जमीन पर 12 महीने सब्जी की खेती कर आत्मनिर्भर हो रहे हैं।

सबसे ज्यादा 11 छोटे-बड़े तालाब

सिनापाली गांव में आज हर कोई बसना चाह रहा है। कारण है यहां कभी भी लोगों का पानी की समस्या से नहीं जूझना पड़ता है। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि यहां सबसे ज्यादा 11 छोटे बड़े तालाब मौजूद हैं। जिन्हें यहां के ग्रामीणों के पूर्वजों ने कई साल पहले बनवाया था। जिसका सुख आज तक इस गांव के लोग भोग रहे हैं। हालांकि इस बार गर्मी के चलते 5 छोटे तालाब के पानी सूख गए हैं । लेकिन 12 एकड़ में फैला दियान तालाब,8 एकड़ में फैला ऊपर तालाब,2-2 एकड़ में फैले गोहटिया तालाब, ढ़ाई एकड़ के साहू तालाब और लगभग डेढ़ एकड़ में फैले कोदो तालाब में पूरी गर्मी भर के निस्तारी के लायक पानी है। इसके अलावा भी कुछ और तालाब हैं जहां अभी पर्याप्त पानी है। इतना ही नहीं गांव में भी 24 हैंडपंप मौजूद हैं।

1830 के आसपास खुदवाया गया तालाब

भरपूर पानी रहने वाले सभी तालाब 150 से 200 साल पुराने हैं। गांव के 90 वर्षीय रोहित मांझी बताते हैं कि उनके दादा मोहन सिंह ने उन्हें बताया था कि परदादा गरुण सिंह 1830 के आसपास गांव के मालगुजार थे। उस समय गांव की आबादी 500 भी नहीं थी, लेकिन दादा ने गांव में 8 एकड़ में तालाब खुदवा दिया(ऊपर तालाब)। इस निस्तारी तालाब के नीचे दल-दल बनता था,इसलिए निचले हिस्से के 2-2एकड़ में दो और तालाब बना दिया(गोहटिया तालाब)। उस दौरान आस पास के चार-पांच गांव के लोग भी पीने के उपयोग में लाते थे।

जमींदारी प्रथा में गांव में मालगुजार के अलावा दीवान और मकड़दम का भी पद हुआ करता था। मालगुजार के तालाब खुदाई से प्रेरित होकर गांव के दीवान गंगाराम मांझी और मकड़दम जो साहू परिवार से थे, उन्होंने भी तालाब खुदवा दिया। 19वीं सदी से पहले दीवान ने सबसे बड़ा तालाब 12 एकड़ में खुदवाया(दियान तालाब) मक़डदम सोनाधर साहू के पिता ने भी पहले तालाब खुदवा दिए।

आजादी के पहले ही खुद गए तालाब, आबादी भी बढ़ गई

आजादी के पहले तक ही इस गांव में 5 से ज्यादा बड़े तालाब खुद गए। आजादी के पहले जहां इस गांव की जनसंख्या सिर्फ 500 हुआ करती थी वो अब बढ़कर 3500 से 4000 तक पहुंच गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है यहां के तालाब, जिसके कारण लोगों का रहन-सहन और उनकी आर्थिक स्थिति काफी बेहतर हुई। पानी किसी भी गांव के लिए सबसे प्रमुख संसाधन है। जिसकी वजह से इस गांव में सभी समाज वर्ग के लोगों की बसाहट हुई और अब ये देवभोग ब्लॉक का सबसे बड़ा गांव बना गया।

इतना ही नहीं इन तालाबों ने कई लोगों को रोजगार दिया। इस गांव में वर्तमान में 40 परिवार ऐसे हैं,जो 60 हेक्टेयर से भी ज्यादा जमीन पर 12 माह सब्जी की खेती कर अच्छी आमदनी कमा लेते हैं। गांव के इस संसाधन के चलते आज पूरा गांव संपन्न और खुशहाल है।


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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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