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लाखों रुपयों की लागत से बना वन विभाग का सरकारी आवासीय भवन, खण्डहर में होता जा रहा है तब्दील

मैनपुर- "हमें तो अपनों नें लुटा, गैरों में कहां दम था" यह फिल्मीं डायलॉग वन विभाग पर एकदम सहीं बैठता है। शासन द्वारा शासकीय कर्मचारियों, अधिकारियों के लिए रहने की सुविधा दिलाने लाखों करोड़ों खर्च कर आवास निर्माण कराती है, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते कर्मचारियों, अधिकारियों को ये सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।          

मैनपुर विकासखण्ड उदन्ती वन मण्डल के वन परिक्षेत्र तौरेंगा (बफर) में लाखों रुपये की लागत से विभाग के कर्मचारी, अधिकारियों के रहनें के लिए पक्की आवास का निर्माण वर्ष 2009-10 में किया गया था। लेकिन ग्राम तौरेंगा में आवास गृह का अधूरा निर्माण कर छोंड़ दिया गया, जिस कारण आज भवन खण्डहर में तब्दील होता जा रहा है। ज्ञात हो कि ग्राम तौरेंगा में तात्कालिक समय में वन विभाग द्वारा तीन पक्की आवास गृह निर्माण प्रारंभ कराया गया। जिसमें दो भवन को अधूरा निर्माण कर छोंड़ दिया गया, जो इन दिनों मवेशियों का डेरा बन गया है। दोनों भवनों की दरवाजें, खिड़कियां सड़ने लगी है, छत से बारिश का पानी रिसता है। भवन दिन ब दिन खस्ताहाल होता जा रहा है, लेकिन विभाग इसकी सुध नहीं ले रहा है। 

भवन बना मवेशियों का डेरा, जहरिले कीड़े मकोड़े का भी खतरा बतादें कि दोनों भवन मवेशियों का डेरा बन गया है, लंबे समय से अधूरा व खाली पड़े भवनों में जहरिले कीड़े, मकोड़े, सर्प, बिच्छु भी पाए जाते हैं। चुंकि दोनों भवनें गांव के बीच में स्थित होने से ग्रामीणों पर जहरिले कीड़े, मकोड़े, सर्प आदि का भय भी बना रहता है। दोनों भवन लंबे समय से अधूरा निर्माण कर छोंड़नें के कारण, भवनें जर्जर हालात में है, जो कि कभी भी धराशायी हो सकता है। भवन के आस-पास छोटे-छोटे बच्चें खेलते रहते हैं, ऐसे में खेलने वाले बच्चों पर भी हादसे की आशंका बनी रहती है। लेकिन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है, यह चिंता का विषय है।           

अधूरे भवनों तत्काल पूर्ण निर्माण करें वन विभाग, या फिर भवनों ढहा दिया जाए- युमेन्द्र कश्यप ग्राम तौरेंगा के युवा नेता, युवा संघर्ष मोर्चा जिलाध्यक्ष युमेन्द्र कश्यप नें दोनों अधूरे भवनों को पूर्ण कराने की मांग करते हुए कहा- कि वन विभाग इन भवनों को या तो पूर्ण निर्माण कराए या भवनों ढहाया जाए। विभागीय लापरवाही के कारण ये दोनों भवनें आज भी अधूरे हैं। जो कि खण्डहर में तब्दील होता जा रहा है, ग्रामीणों पर खतरे का भय बना रहता है। ऐसे में इन भवनों को पूर्ण निर्माण करानी चाहिए। लेकिन विभाग की इस ओर ध्यान नहीं यह चिंताजनक है।


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