सुअर बना जी का जंजाल.. गवानी पड़ी जान…..सुअर बांध कर रखने कह... - CG Sandesh

सुअर बना जी का जंजाल.. गवानी पड़ी जान…..सुअर बांध कर रखने कहने की मामूली बात पर बुजुर्ग की निर्मम हत्या….

शाम करीबन 05.00 बजे थाना प्रभारी छुरा निरीक्षक संतोष गुआर्य को जरिये मोबाईल सूचना मिली कि ग्राम घोंटपानी निवासी माधोराम गोड पारा अपने पड़ोसी करण सिंह कुंजाम उम्र करीबन 75 वर्ष को धारदार टगिया से हमला कर हत्या कर दिया है तथा उसके कटे हुए सिर को लेकर जंगल की ओर भाग गया है उक्त सूचना को तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया । जिससे पुलिस अधीक्षक महोदया श्रीमति पारूल माथुर द्वारा थाना प्रभारी को आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया एवं उनको मार्गदर्शन ,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर , संतोष महतो के दिशा निर्देशन तथा अनुविभागीय अधिकारी पुलिस गरियाबंद संजय घुव के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी छुरा निरीक्षक संतोष भुआर्य द्वारा तत्काल अपनी पुलिस टीम के साथ आरोपी की पतासाजी हेतु रवाना हो गये दौरान मुखबिर सूचना पर आरोपी माधोराम गोंड हाथ में

मृत करण सिंह का कटा हुआ सिर लिये ग्राम नरतोरा के पास मिला जिसे पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर थाना लाया गया समय बाद प्रार्थी भगवानी राम कुंजाम द्वारा अपने पिता करन सिंह की हत्या की घटना की रिपोर्ट थाना छुरा पहुंचकर किया गया जिससे थाना प्रभारी द्वारा घटना स्थल ग्राम पोटपानी पहुंचकर गांव वालों के समक्ष शव का जांच पंचनामा कार्यवाही किया गया आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त टंगिया एवं आरोपी द्वारा पहने खुन लगे हुए कपड़ों को जप्त किया गया । आरोपी द्वारा उक्त हत्या मृतक द्वारा अपनी बाड़ी के जिमी कांदा आदि को उसके सुअरों द्वारा नुकसान करने की बार बार शिकायत करने के कारण उक्त घटना को कारित करना स्वीकार किया जिससे आरोपी को गिरपतार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा जा रहा है उपरोक्त कार्यवाही में थाना छुरा के निरीक्षक संतोष भुआर्य , सउनि. श्रवण विश्वकर्मा , आरक्षक माधव साहू , रविशंकर नेताम , अशोक मिंज , शिवदयाल नागेश , मोहित चुरेन्द्र की सराहनीय भूमिका रही


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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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