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संविदा रूपी गुलामी से अब रोजगार सहायकों की मुक्ति के आसार :- नरेन्द्र कुमार कश्यप , गरियाबंद जिला अध्यक्ष रोजगार सहायक संघ

रोजगार सहायकों को 90 दिवस में नियमित करे सरकार - उच्च न्यायालय

प्राकृतिक न्याय के सिंद्धान्त को देखते हुवे 90 दिन के अंदर नियमितीकरण हेतु सरकार का पक्ष रखते हुए जवाब मांगा है।

रोजगार सहायकों के नियमितीकरण के लिए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से मांगा जवाब

गरियाबंद: देवभोग, छ0ग0 में मनरेगा अधिनियम अंतर्गत समस्त ग्राम पंचायतों में संविदा में नियुक्त ग्राम रोजगार सहायकों को 90 दिन में नियमित करने की कार्यवाही करने माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में दाखिल याचिका अधिवक्ता मीना शास्त्री के माध्यम से याचिकाकर्ता छ0ग0 ग्राम रोजगार सहायक संघ के अध्यक्ष सन्तोष कुमार सोनवानी (ग्राम रोजगार सहायक दुर्ग),भूपेंद्र चंद्राकर (दुर्ग), झावेंद्र वर्मा (भाठापारा),जयंत टंडन(बलौदा बाजार) ने नियमितीकरण के लिए माननीय न्यायमूर्ति पी.एस. कोशे के न्यायालय में याचिका लगाई। जिसकी सुनवाई में न्यायमूर्ति ने छ0ग0 सरकार को ग्राम रोजगार सहायक को उनके कार्य की प्रकृति को देखते हुए एवं प्राकृतिक न्याय के सिंद्धान्त को देखते हुए 90 दिन के अंदर नियमितीकरण हेतु सरकार का पक्ष रखते हुये जवाब मांगा है।

वहीं इस फैसले की प्रतिलिपी प्राप्त होने पर मनरेगा विभाग के आलाधिकारियों ने ग्राम रोजगार सहायकों को अपना पक्ष रखने के लिए याचिकाकर्ताओं को मंत्रालय तलब किया है।जिसकी तैयारी पूरे छ0ग0 के ग्राम रोजगार सहायक तैयारी में लगे है। इस फैसले से सम्पूर्ण छ0ग0 के ग्राम रोजगार सहायकों में हर्ष व्याप्त है। पुनः रोजगार सहायक फिर से लामबंद होकर तैयारी में लगे है। गरियाबंद जिला अध्यक्ष नरेन्द्र कुमार कश्यप ने कहा की फैसले से रोजगार सहायकों में फिर से उम्मीद की किरण जागी है कि 14-15 साल की संविदा रूपी गुलामी से अब रोजगार सहायकों को मुक्ति मिल जाएगी।



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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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