मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता का गिरफ्तारी ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है..
ज्ञात हो कि कल ही नंद कुमार बघेल की गिरफ्तारी हुई है उन्होंने जमानत लेने और वकील रखने से मना कर दिया और अपनी पैरवी खुद कर एसटी एससी ओबीसी और अल्पसंख्यक के लिए जेल जाना चुना। गिरफ्तारी के बाद फेसबुक और ट्विटर में टॉप टेन में ट्रेंड कर रहा है। व्हाट्सएप ग्रुप में भी सबसे ज्यादा शेयर और चर्चा का विषय बना हुआ है ।बड़ी संख्या में देशभर के एसटी एससी ओबीसी और अल्पसंख्यक एक साथ आ गए ।। पहली बार युवाओं की टोली हजारों की संख्या में नंद कुमार बघेल के पक्ष में आ गई है।।
याद रहे छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्य मंत्री स्व.अजित जोगी सरकार ने एक बार ऐसे ही मुद्दे पर नंदकुमार बघेल को गिरफ्तार करवाया था उसका हश्र क्या हुआ फिर कभी उनकी सरकार नहीं बनी। कांग्रेस को 15 साल का वनवास वाला श्राप अपने आप मिला था। अब खुद अपने 85 साल के बुजुर्ग पिता नंदकुमार बघेल जी को कानून का राज के नाम पर गिरफ्तार खुद उसके बेटे ने कुछ भाजपा के समर्थक ब्राह्मणों की साजिश के तहत जेल में भिजवाया जबकि उन्होंने ब्राह्मण समाज के प्रति अपना सम्मानजनक खेद प्रकट किया था। सीनियर बघेल अनेकों बार अपने पिछड़े,आदिवासी,दलित मूलनिवासी समाज की बेहद गुलामी और लाचारी के लिए जातिवाद ब्राह्मणवाद को दोषी मानते है । उनके बयान में ब्राह्मणों को विदेशी बताना यदि गलत था तो नेहरूजी,लोकमान्य तिलक और बड़े इतिहासकारों को जिन्होंने आर्य विदेशी लिखा उसका क्या करेंगे ब्राह्मण समाज और कांग्रेसी ..। किसी भी जाति के खिलाफ वैमनस्यता फैलाना जुर्म है और अच्छा हुआ की भूपेश बघेल ने अपने पिता को अपराधी बना दिया जबकि उन्होंने उन ब्राह्मणों को सुधारने के लिए कहा था । फिर भी हम यदि समाज में शांति व्यवस्था बनाने के लिए मान लेते हैं तो क्या अब उन ब्राह्मण लोगो द्वारा क्या अब रामायण में तेली ,कुम्हार, कलार, भांगी, कोल, जातियों को नीच वर्ण होने,महिलाओं और 85%मेहनतकश पिछड़े वर्गो को शूद्र ,गवार, कहकर डोल,और पशुओं की तरह ताड़ने वाली घृणा फैलाई जा रही है अब क्या उन ब्राह्मणों के खिलाफ सभ्य ब्राह्मण समाज कोई एफ आई आर थानों में लिखवाएगा या पिछड़े वर्ग के लोग करें तो भुपेश बघेल क्या सबको गिरफ्तार करेंगे..सोचने की बात है । अब तो आपने पत्थर मार दिया अब कैसे होगा प्रेम का रास्ता अब संग्यान लेकर करिए गिरफ्तार उस भाजपा की महासचिव और सभी भाजपा नेताओ को जिन्होंने दलित आदिवासियों बाहुल्य विधायकों और मंत्रियों के उपर थूक देने की घृणित बयानबाजी की है। यही अब हमको देखना है। हम भी स्वागत करते कानून के रक्षक भूपेश जी का किन्तु अब देखना है कि संविधान और कानून को पैरो पर कुचलने वाले पुलिस थाने में घुसकर पादरी को जूते से मारने वालों के संगठनों पर क्या एक्शन लेते हैं।