स्कूलों में बंटी योग की 55 लाख किताबें, पढ़ाने के लिए नहीं हैं शिक्षक
छत्तीसगढ़ में योग शिक्षा को बढ़ावा देने के नाम से पूरे प्रदेशभर में कक्षा पहली से 10वीं तक के बच्चों को 55 लाख किताबें बांट दी गयी हैं. लेकिन इस किताब को पढ़ाने के लिए न तो स्कूलों में योग शिक्षक हैं और न ही संस्कृत में लिखे वाक्यों को बच्चे खुद समझ पा रहे हैं. योग की किताब केवल फिजूलखर्ची साबित हो रही है.
बच्चों को योग से जोड़ने के लिए प्रदेश में कक्षा 1 से 10वीं तक के 55 लाख बच्चों को हर साल ये किताब मुफ्त में बांटी जा रही है. लेकिन किताब में उपयोग किये गये संस्कृत वाक्यों और योग शब्दावली को समझाने के लिए कोई टीचर नहीं है.
पाठ्य पुस्तक निगम के महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी की मानें तो इस साल भी योग शिक्षा की ये किताब छपवाने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्ष परिषद् यानी एससीईआरटी ने फिर पाठ्य पुस्तक निगम को प्रस्ताव भेजा है. जानकारों की मानें तो भले ही योग सीखाने की मंशा सही हो, लेकिन सवाल यहां जिम्मेदारों की समझ पर उठता है. क्योंकि ये किताब संस्कृत भाषा में है. जब पहली दूसरी के बच्चे जो जिन्हे ठीक से हिन्दी पढ़ना नहीं आता वो संस्कृत में लिखी किताब को बिना शिक्षक के कैसे पढ़ सकेंगे.