अचानकमार टाइगर रिजर्व में ग्रामीणों की आवाजाही मामले में हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित
बिलासपुर:- अचानकमार टाइगर रिजर्व की रोड बंद करने और बैरियर लगाकर ग्रामीणों से रोज नाम पता पूछने ,पहचान बताने जैसी समस्याओं के मामले में हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है । अचानकमार टाइगर रिजर्व बनने के बाद यहां के 25 गांव का विस्थापन बाहर किया जाना था लेकिन 6 गांव के विस्थापन के बाद सरकार ने इस योजना को पर्याप्त धन भी नहीं दिया और ध्यान भी नहीं दिया लिहाजा आज भी टाइगर रिजर्व के अंदर 19 गांव के हजारों निवासी निवास करते हैं ।इन सभी आदिवासी ग्रामीणों को शहरों में आना जाना पड़ता है जिसके लिए वह यात्री बसों का सहारा लेते थे लेकिन अब नियमों के मुताबिक टाइगर रिजर्व में आवाजाही तय सीमा में ही हो सकती है लिहाजा शासन ने शिव तराई के पास बैरियर लगाकर अचानकमार टाइगर सड़क बंद कर दी। साथ ही जंगल के अंदर रहने वाले ग्रामीणों को भी आने जाने के लिए परिचय पत्र अनिवार्य कर दिया ।
ग्रामीणों को परेशानियां हो रही है इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए लोरमी के पूर्व विधायक धर्मजीत सिंह ने एक याचिका हाई कोर्ट के समक्ष पेश की थी ।इस याचिका में कहा गया था कि किसी का रास्ता रोकना उसके मौलिक अधिकार का हनन है याचिका में यह भी कहा गया शासन गांव को विस्थापित भी नहीं कर रही है और ग्रामीणों का रास्ता भी रोक रही है। हाईकोर्ट में याचिका के बाद राज्य शासन और कई विभागों नोटिस जारी की थी। इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में जारी थी ।।सोमवार को सुनवाई पूरी हो गई और कोर्ट में फैसला सुरक्षित रख लिया। अचानकमार के वासियों को न्याय की पूरी उम्मीद है।