पिथौरा : मनरेगा में तालाब के नाम से फर्जी आहरण, रोजगार सहायक पद से पृथक, दूषित जांच में क्लीन चिट देने वालो की शिकायत आयुक्त से
मनरेगा
में प्रमाणित गडबडी को भी जांचकर्ता अधिकारियो का दल क्लीन चिट देकर आरोप निराधार
है, लेखकर दूषित जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत
कर दिया है। इससे से अधिक हास्यप्रद है कि जिले में बैठे जिम्मेदार अधिकारी इन
भ्रामक और दूषित जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करके शासन को गुमराह करने वाले अधिकारियो
को संरक्षण देकर सिर्फ चेतावनी पत्र जारी करके मामले को ठंडा बस्ता में डाल दिया
है। इसका खुलासा सूचना का अधिकार के दस्तावेज से हुआ है।
प्राप्त
जानकारी के अनुसार पिथौरा जनपद पंचायत के अन्तर्गत घोंच ग्राम पंचायत में वर्ष
2020 में बांस प्लाट नया तालाब निर्माण कार्य कुल राशि 19 लाख 58 हजार की
प्रशासकीय स्वीकृति हुआ था। इसमें रोजगार सहायक नृपत सोना के फर्जी मस्टर रोल भरकर
राशि आहरण करने की शिकायत ग्रामवासियो ने किया। ग्रामीणो की शिकायत पर इस मामले की
03 दफा जांच किया गया है।
प्रथम जांच :- पिथौरा जनपद पंचायत स्तर से प्रथम जांच दिनांक 08 जून 2020 को प्राथमिक शाला भवन घोंच में हुआ। जिसमें फर्जी हाजिरी 291713 रूपए का मिला। वही 05 मजदूरो के बयान के आधार पर 150791 रूपए का कार्य किया जाना बताया गया। वही कुल राशि 140922 रूपए का फर्जी मस्टररोल बनाने के लिए प्रत्यक्ष रूप से दोषी है, इसलिए रोजगार सहायक से इस राशि की वसूली योग्य होने का लेख किया है।
द्वितीय जांच :- पिथौरा जनपद पंचायत के निर्देश से पुनः जांचकर्ता अधिकारीगण गौरीशंकर पैकरा तकनीकी सहायक, अजय कुमार साहु तकनीकी सहायक, दीपक बढई तकनीकी सहायक, एवं रेशमलाल भारती करारोपण अधिकारी के द्वारा 06 फरवरी 2021 को जांच किया गया। इन चारो जांचकर्ता अधिकारियो ने लेख किया है कि मस्टररोल में रोजगार सहायक द्वारा किसी भी प्रकार का फर्जीवाडा नही किया गया है। लगाये गये आरोप निराधार एवं गलत है। रोजगार सहायक के उपर भ्रष्टाचार संबंधी लगाये गये आरोप निराधार है।
तृतीय जांच :- जिला पंचायत महासमुन्द के आदेश से इस मामले की पुनः तीसरी बार 28 जुलाई 2021 को जांच हुआ। जिसमें जांचकर्ता अधिकारियो में बाबूलाल नायक विकास विस्तार अधिकारी जपं बसना, रोहित राव भोसले लेखापाल नरेगा, समीर तिवारी तकनीकी सहायक नरेगा, एवं वरूण कुमार यादव समन्वयक शिकायत निवारण नरेगा को जांच की जिम्मेदारी दिया गया। जांच अधिकारियो ने इस मामले में पाया कि 209639 रूपए की गडबडी हुआ है। जिसकी वसूली तात्कालिन सरपंच, तात्कालिन सचिव एवं रोजगार सहायक से करते हुए अनुशासनात्मक कार्यवाही का लेख किया।
पूर्व
जांचकर्ता अधिकारियो के द्वारा भ्रामक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने एवं बिना जांच के
ही मजदूरो द्वारा दिए गए बयान के आधार पर प्रथम जांच प्रतिवेदन को निराधार बताए
जाना उच्चाधिकारियो द्वारा दिए गए निर्देशो की अवहेलना की श्रेणी में आता है।
इसलिए जांचकर्ता अधिकारियो के विरूद्व अनुशानात्मक कार्यवाही किया जाना उचित है।
इस तथ्य को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत महासमुन्द को लिखा है।
इस मामले में रोजगार सहायक से राशि की वसूली करने का लेख करते हुए रोजगार सहायक को पद से पृथक कर दिया गया है। लेकिन इन चारो जांचकर्ता अधिकारियो के विरूद्व कार्यवाही नही होने से आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमार दास ने दिनांक 30 मार्च 2022 को आयुक्त महात्मा गांधी नरेगा अटल नगर कार्यालय में जाकर समस्त दस्तावेज सहित आवेदन सौंपा है। आवेदन में आयुक्त कार्यालय से जांच कराने की मांग किया है।