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पुलिस ने पिता को पीटा तो बेटे ने ट्रेन के सामने कुदकर की आत्महत्या...जाने फिर क्या हुआ

बिलासपुर। जिले में एक युवक ने ट्रेन के सामने कूद कर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि युवक और उसके पिता को पुलिस पकड़कर ले गई थी, और बेटे के सामने पिता की पिटाई कर दी थी। इससे मानसिक तनाव में आकर युवक ने आत्महत्या की है। इस घटना के बाद लोगों का आक्रोश भड़क गया और थाने का घेराव कर जमकर हंगामा मचाया। पूरा मामला बिल्हा थाने का है।


जानकारी के अनुसार बिल्हा क्षेत्र के ग्राम भैंसबोड़ निवासी हरीश चंद्र गेंदले (23) पिता भागीरथी रोजी-मजदूरी करता था। बताया जा रहा है कि गांव में किसी लड़की से हुए विवाद को लेकर उसके खिलाफ पुलिस से शिकायत हुई थी, जिस पर पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए थाने बुलाया। लेकिन, युवक थाने नहीं पहुंचा, तब पुलिस उसकी तलाश करते हुए गांव पहुंच गई। लेकिन, युवक घर में नहीं मिला तो पुलिस उसके पिता भागीरथी को पकड़कर थाने लेकर आ गई।

पिता के पकड़े जाने की खबर मिलते ही युवक भी बिल्हा थाने पहुंच गया। इस दौरान उसके सामने में आरक्षक रूपलाल चंद्रा ने उसके पिता की पिटाई कर दी। हालांकि, बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और युवक व उसके पिता को छोड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि युवक सोमवार की शाम अपने घर पहुंचा। इसके बाद देर शात करीब 7 बजे वह बिना बताए घर से निकल गया। वह पैदल रेलवे ट्रैक की ओर चला गया और ट्रेन के सामने कूद कर जान दे दी। ट्रेन की चपेट में आकर युवक के कई टुकड़े हो गए। रात करीब 9 बजे परिजन को इस घटना की जानकारी हुई, तब वे घटनास्थल पहुंचे।

गांव में इस घटना की जानकारी मिलते सतनामी समाज के लोगों का आक्रोश भड़क गया। उन्होंने पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए थाने का घेराव कर हंगामा मचाना शुरू कर दिया। इसके चलते तनाव की स्थिति बन गई है। वहीं, मौके पर पुलिस और राजस्व विभाग के अफसर मौजूद हैं। ग्रामीण इस मामले में प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए आरक्षक रूपलाल चंद्रा को सस्पेंड करने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही उसके खिलाफ FIR दर्ज करने की भी मांग कर रहे हैं।




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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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