बसना : ग्रामीण डाक सेवकों की 17 दिनों से हड़ताल जारी रहने से पार्सल व डाक जगह-जगह फंसे
ग्रामीण डाकसेवकों की 14 मई से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार पिछले 17 दिनों से जारी है. इस वजह से डाक वितरण का काम ठप है. डाकघरों में रजिस्ट्री, मनी ऑर्डर, मनरेगा भुगतान समेत अन्य काम बाधित हो रहा है. इसके चलते ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हड़ताल के कारण हजारों पत्र व पार्सल जगह-जगह फंसे हैं। लेन-देन भी प्रभावित है उधर डाक कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि मांगे नहीं मानने तक आंदोलन जारी रहेगी.
डाक सेवकों ने कहा कि देश में 80 फीसदी आबादी गांवों में रहती है, जहां ग्रामीण डाक कर्मचारी सेवा करते हैं, लेकिन केंद्र सरकार इन डाक सेवकों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। ये डाक सेवक महज पांच से 10 हजार रुपये के मासिक वेतन पर काम कर रहे हैं, जिससे परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो गया है.
डाकसेवकों की लंबी मांग के बाद सातवें वेतन आयोग से संबंधित कमलेश चंद्र की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया, जिसने अपनी रिपोर्ट भी करीब डेढ़ वर्ष पहले पेश कर दी है, लेकिन केंद्र सरकार आज तक भी यह रिपोर्ट लागू नहीं कर पाई है. इसी मांग को लेकर डाक सेवक हड़ताल करने को मजबूर हो रहे है, जिससे एक लाख से अधिक डाकघर प्रभावित हो रहे है. उन्होंने मांग की कि उक्त कमेटी की रिपोर्ट लागू की जाए और डाक सेवकों को विभागीय कर्मचारी माना जाए.
हम अनिश्चित कालीन हड़ताल में है यदि किसी का पार्सल आता है तो फोन के माध्यम से सूचना उस तक पहुँचा दी जाती है. यदि कोई अपना सामान लेने नहीं आता है तो उसे वापस भेज दिया जाता है.
----केसरी नंद, पोस्टमेन, जगदीशपुर