बसना – रेमड़ा पुल की मरम्मत के लिए करना होगा 1 वर्ष का इंतज़ार... - CG Sandesh

बसना – रेमड़ा पुल की मरम्मत के लिए करना होगा 1 वर्ष का इंतज़ार.

सेल्फी लेना आजकल के मोबाइल धारकों का फैशन बन गया है लोग अच्छे-अच्छे जगहों में सेल्फी लेते हैं और सोशल मीडिया में अपलोड करते है. लेकिन आजकल एक नया तरीका आ गया है लोग भ्रष्टाचार और विकास की कमी को दिखाने के लिए उस जगह पर जाकर लोग सेल्फी ले रहे हैं और सोशल मीडिया में वायरल कर रहे हैं. यह लोग यह दिखाना चाह रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में जिन योजनाओं को ग्रामीणों के फायदा के लिए या आवागमन के लिए बनाया जाता है उसमें किस तरह से भ्रष्टाचार करके गुणवत्ताहीन कार्य का निर्माण किया जाता है. जिसका खामियाजा ग्रामीण क्षेत्र के बसे लोगों को भुगतना पड़ता है.

इसी तरह बसना ब्लाक के ग्राम पंचायत रेमड़ा के एक युवा उग्रसेन साकरे ने लगातार कई दिनों से सोशल मीडिया पर अपने गाँव की जर्जर पुल की फोटो उपलोड करते आये है.

उनका कहना है कि जिस मार्ग पर यह पुलिया बनाया गया है नीचे में जमीन से गड्ढा ना करके लगभग 5 फीट ऊपर बना दिया गया है. जब पानी आता है तो पानी पुलिया से निकासी ना होकर ऊपर हो जाने के कारण मटेरियल को नुकसान पहुंचाता है. जिसके कारण नीचे में जो मटेरियल ढोल के नीचे में लगाया गया है जिसको हम बेड बोल सकते है वह धीरे-धीरे पानी के रुकाव के कारण धसता चला गया और आज आधा से भी ज्यादा हिस्सा पानी में बह गया.

इस पूल से बड़े-बड़े वाहन भी गुजरते हैं जिनमे प्राइवेट स्कूलों के वाहन, दुग्ध वाहन, किसानों के ट्रैक्टर आदि है.  इसके बारे में लोगों द्वारा कई बार विभागीय अधिकारियों को शिकायत भी किया जा चुका है लेकिन अभी तक कोई भी अधिकारी संज्ञान में नही लिया है.


जब इस बारें में जब PWD के स्थल सहायक प्रफुल चंद होता से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इस पुल का निर्माण 15 साल पहले 9 लाख रु की लगात से सुनिश्चित रोजगार योजना के तहत बना था. उस समय ग्रामीण लोगो को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पुलिया सड़क तालाबो का निर्माण करवाया जाता था जिसके तहत कुल लागत से 60 प्रतिशत मजदूरो को दिया जाता था तथा बाकी 40 प्रतिशत राशि से मटेरियल आता था जिससे निर्माण किया जाता था. उस समय कान्क्रेटिंग नहीं किया जाता था पत्थरों को लगा कर जाम किया जाता था जिससे ज्यादा मजबूती नहीं मिल पाती थी.

उन्होंने बताया कि जिला सदस्य डॉ अखिलेस भोई द्वारा निरिक्षण किया गया था जिसमे शासन को बाक्स कलवर्ट पुलिया की मांग किया गया.  जिसमे लगभग 1 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया जा रहा है.

फिलहाल मरम्मत को लेकर प्राकलन तैयार कर उच्च अधिकारियों के पास भेज दिया गया है तथा लगभग 19 लाख रु की लागत से पुलिया का रिपेयरिंग किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस साल तो शायद मुश्किल है क्योंकि बजट नहीं मिल पाया है लेकिन अगले साल निश्चित तौर पर पुल के रिपेयरिंग का कार्य किया जाएगा और इस बीच अगर पुलिया भास्कर गिर जाती है तो पुलिया का नया निर्माण किया जाएगा.

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि पुलिया के सामने एक स्टाप डेम भी है जिसमे पानी को स्टोरेज के लिए जब डेम में रोका जता है तो बहकर पानी रोड के माध्यम से पुलिया के उपर से  गिरता है जिसके कारण भी नुक्सान होता है. अगर यहाँ पर बाक्स कलवर्ट स्मार्ट पुलिया बनाया जाता तो अच्छा होता.




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