कौन है अन्नदाता किसान इसकी दुर्दशा का जिम्मेदार कौंन ??? – अनुराग नायक
संपादकीय | एक अन्न दाता किसान वह है जिसका चेहरा जो हमेशा चिंता की लकीरों से सजी रहती है, हमारे आँखों के सामने परिकल्पित होने लगता है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति में अपनी पहचान और अस्मिता को तलाशता किसान, सूरज की किरणों से पहले जागना, शाम ढलने के बाद तक अपने खेतों को सँवारने व फसलों की सुरक्षा की जुगत में लगा रहना, रात सोते आसमान की तरफ देखकर मौसम के अनुकूलन की प्रार्थना करने के साथ ही न जाने कितने सारे अनगिनत प्रश्न उसके मन-मस्तिष्क में उमड़ने लगते हैं मसलन अगली फसल के लिए बीज, खाद, पानी की चिंता, बेटे-बेटी की पढ़ाई की चिंता, बेटी की शादी की चिंता, नेवता-हंकारी की चिंता, पिछला कर्ज चुकता करने की चिंता, परिवार की सकुशलता की चिंता इत्यादि अनगिनत प्रश्नों का उत्तर ढूंढते न जाने कब सुबह हो जाता है।
किसानों की बदहाली और आत्महत्याओं के लिए सरकारों की दोषपूर्ण नीतियां जिम्मेदार हैं।
एक तरफ जहाँ भारतीय कृषि को जीवन जीने का तरीका माना जाता था वही आज किसान को आत्महत्या तक पर मजबूर कर रहा है। किसान आत्महत्या आज भारतीय समाज के लिए एक अभिशाप बन गया है। आज भी हमारे देश के अधिकांश किसान निर्धनता की रेखा के नीचे तंगहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
किसानों की बदहाली और आत्महत्याओं के लिए सरकारों की दोषपूर्ण नीतियां जिम्मेदार हैं। हालात ऐसे भी बुरे नहीं है कि सरकार इसे नियंत्रित ना कर पाए। लेकिन सरकार में इच्छाशक्ति का अभाव है। किसानों के लिए जो सुविधाएं या सब्सिडी मिलती है वह काफी नहीं है।
किसानों की आत्महत्या रोकने का कार्य सरकार कई किसान कल्याण एवं कृषि विकास की योजनाओं द्वारा कर सकती है। साथ ही सरकार को फसल बीमा एवं कई अन्य प्रकार की सहायता जैसे सहकारी बैंकों से कम ब्याज दर पर ऋण की उपलब्धता कराना,डिफाल्टर किसानों की कर्ज माफी एवं उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उच्च स्तर के खाद, कीटनाशक, उत्तम कृषि यंत्र प्रदान करना एवं भूमिहीन किसानों को भूमि उपलब्ध कराना आदि उपायों के द्वारा सरकार किसानों की आत्महत्या को रोकने में कामयाब हो सकती है। फसल बीमा, फसलों का उच्च समर्थन मूल्य एवं आसान ऋण की उपलब्धता सरकार को सुनिश्चित करनी होगी तभी किसानों की स्थिति सुधरेगी और उन्हें आत्महत्या करने से रोका जा सकेगा।