बसना: आरोपों के चलते 2 वर्षों से लटका गौरवपथ का निर्माण कार्य.
बसना नगर से पदमपुर जाने वाली मुख्य मार्ग पर शहीद वीरनारायण चौक से सिटी ग्राउंड लगभग 1.5 किलोमीटर तक गौरव पथ बनाया गया है. वर्त्तमान में इस सड़क पे इतने गड्डे हो गए है कि इसमें से चल पाना रहगोरों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है. जबकि गढ़फुलझर में धान संग्रहण केंद्र तक धान ले जाने के लिए इस सड़क पर हमेशा माल से भरी ट्रको का आवागमन होता है. गढ़फुलझर में ना सिर्फ धान संग्रहण केंद्र बल्कि वह एक पर्यटन स्थल भी घोषित कर दिया गया है.
गढ़फुलझर से होते हुए यह मार्ग आगे की ओर ओडिशा में पदमपुर, नरशिंगनाथ, झारबंद, एवं पाइकमाल को जोड़ता है. ओडिशा पहुँच के मुख्य मार्ग होने के बावजूद लोग जब इस गौरव पथ पर से गुजरते है तो विकास के रूप में उन्हें सड़क पर सिर्फ गड्डे दिखाई देते है. यदि बरसात की बात की जाए तो यहाँ से गुजरते वक्त ऐसा लगता है मानो किसी तालाब पर से जा रहे हो.
ज्ञात हो कि गड्डे की वजह से आये दिन इस सड़क पर कई हादसे भी होते आये है. जिसमे 24 जनवरी 2018 को हुए हादसे को शायद ही अभी तक कोई भूल पाया होगा जिसमे ट्रक की चपेट में आने से स्कूटी सवार की मौत हो गयी थी.

http://cgsandesh.com/Home/NewsDetails/4468
लेकिन सड़क की इस हालत को लेकर पिछले 2 वर्षों से जब भी इस सड़क के निर्माण की मांग की जाती है तो तब अधिकारी किसी अन्य को दोषी बनाकर उसपर अपना पल्ला झाड़ देते है. इस मामले को लेकर 20 जुलाई 2016 को नईदुनिया के वेब पोर्टल में एक लेख प्रकाशित है जिसमे नगर पंचायत के इंजीनियर राजेश मिश्रा द्वारा कहा गया है कि
गौरवपथ की फाइल नगर पंचायत में नहीं है। विगत दिनों पहली बैठक में सड़क को समतलीकरण करने की चर्चा हुई थी। सीएमओ आते ही कार्य प्रारंभ किया जाएगा.
-- राजेश मिश्रा, इंजीनियर, नगर पंचायत, बसना.
साथ
ही यह भी लिखा गया था कि ठेकेदार के उपर प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं
होने के कारण ठेकेदार के हौसले बुलंद है.
https://naidunia.jagran.com/chhattisgarh/mahasmund-gaurav-path-782901
इसी मामले को लेकर 09 अक्टूबर 2017 को दैनिक भास्कर के वेब पोर्टल में एक लेख लिखी गयी जिसमे कहा गया कि सीएम ने महासमुंद जिले के विकास के लिए लगभग 136 करोड़ 95 लाख 16 हजार रुपए की लागत के 95 कार्यों का भूमिपूजन 13 सितंबर 2016 को किया था. इसमें बसना नगर पंचायत में 26 करोड़ 67 लाख रुपए की लागत से हाईटेक गौरवपथ का निर्माण भी शामिल था. सीएम की घोषणा पर अमल करने में अफसर अब तक कामयाब नहीं हो पाए हैं.
जबकि अब से चार महीने पहले नगर पंचायत उपाध्यक्ष अभिमन्यु जायसवाल ने कहा कि इस मार्ग के लिए 30 लाख रुपए आ गए हैं. एक या डेढ़ महीने के बाद इस सड़क के कार्य को किया जाएगा. वहीँ नगर पंचायत सी एम ओ दिनेश यादव ने भी यही बात कही थी. 30 लाख रुपये भी जारी हुए और 4 महीने भी बीत गए मगर गौरव पथ का निर्माण कार्य अब भी प्रारंभ नहीं हो पाया.
वहीँ नगर पंचायत सीएमओ दिनेश यादव इस वर्ष फिर इसी बात की रट लगा रखें है कि
ठेकेदार को वर्क का टेन्डर दे दिया गया है. ठेकेदार कार्य प्रारंभ जल्द करेगा पर अभी डामरीकरण नहीं हो पाएगी क्योंकि अभी गौरव पथ में पानी है इसलिए अभी हम डामरीकरण नहीं कर पाएंगे.
-- दिनेश यादव, सीएमओ, नगर पंचायत बसना.
उनका कहना ये है कि दो वर्ष बाद भी जब गौरव पथ का कार्य प्रारंभ होगा तो उसमे भी पूर्ण रूप से डामरीकरण नहीं हो पायेगा.
नगर पंचायत उपाध्यक्ष अभिमन्यु जायसवाल ने भी पुरानी घिसी पिटी बातों को दोहराते हुए कहा कि
गौरव पथ के लिए टेंडर पास हो चुका है, ठेकेदार की लापरवाही की वजह से गौरव पथ सड़क निर्माण रुका हुआ है.
-- अभिमन्यु जायसवाल, उपाध्यक्ष, नगर पंचायत बसना.
आपको बता दें की आज
से ठीक एक माह पूर्व बसना स्थानीय बस स्टैंड में दो करोड़ पचास लाख के विकास
कार्यों का भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम हुआ. जहाँ इस कार्यक्रम में मुख्य आतिथि के रूप
में संसदीय सचिव एवं विधायक बसना रूपकुमारी चौधरी थी तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता
नगर पंचायत के अध्यक्ष सम्पत अग्रवाल ने की जहाँ उन्होंने अगले माह नगर का गौरव पथ
का कार्य शुरु होने की बात कही थी. मगर एक माह बीत जाने के बावजूद भी वह कार्य अब
तक प्रारंभ नहीं हो पाया.
नगर पंचायत में दो करोड़ पचास लाख की लागत से होने वाले निर्माण कार्यों में मुख्य रूप से नगर कांजी हाउस, गार्डन, एसआरएम सेंटर, पदमपुर रोड स्थित गौरव पथ का डामरी करण, पंडित दीनदयाल उपाध्याय मांगलिक भवन कार्य सम्मिलित है.
अब देखने वाली बात यह है कि यह कार्य कब शुरु होकर कब खत्म होता है या सिर्फ आरोप लगाकर ही अधिकारी इस पर से अपना पल्ला झाड़ते रहेंगे.