बसना : मणिकंचन केंद्र से कचरों का ढेर उड़कर पहुँच रहा किसानों के खेत.
बसना नगरपंचायत में खटखटी रोड बाईपास के पास मिशन क्लीन सिटी एवं स्वच्छ भारत मिशन के तहत 10 लाख रुपये की लागत से बनाया गया मणिकंचन केंद्र महज शो पीस बनकर रह गया है. काम करने वाली महिलाएं के आभाव में जहां न तो पालीथिन की छटनी हो पा रही है और न ही उपयोगी कचरों का खाद बन पा रहा है. जिसके कारण से पालीथिन की छटनी कर खाद बनाने की योजना फुस्स होती नजर आ रही है. खाद नहीं बन पाने के कारण यहाँ कचरों का ढेर जमा हो गया है. इनता कि जब भी आंधी तुफान चलता है तो यह कचरा उड़ कर किसानों के खेत में पहुँच जाता है.
वर्तमान में बसना नगर
के लगभग सभी वार्ड से घर-घर पहुंचकर सूखा और गीला कचरा एकत्रित किया जा रहा है. नगरवासियों
को यह सुविधा पिछले लगभग 8 महीने से मिल रही है. घर-घर दो डस्टबिन का वितरण किया
गया है,
ताकि सूखा और गीला कचरा अलग-अलग कर रख सकें और जब यह मणिकंचन केन्द्र
तक पहुंचे तो कचरे की छटनी आसानी से हो जाए. मगर कर्मचारियों के आभाव में यह कार्य
अभी स्थगित है. जिसके चलते लगातार कचरे का ढेर बढ़ता जा रहा.

इस पूरे मामले में जब नगर पंचायत सी.एम.ओ. से बात किया तो बताया कि
मणिकंचन केंद्र में बाउंड्री वाल का प्रावधान नही है. उस एरिये में जाली लगाया जाएगा जिससे कचड़ा बाहर न जाए. किसानों के खेतों में जो कचड़ा जा रहा है उस पर हमारा पूरा ध्यान है. उस जगह पर बकरा मार्केट भी लगाया जाएगा जिसके लिए प्राकलन तैयार कर लिया गया है 15 दिनों में कार्य चालू किया जाएगा.
-- दिनेश यादव, सीएमओ, नगर पंचायत बसना
जब कचरा जाम के बारे में पूछा गया तो बताया गया कि
जिस तरह से अधिक मात्रा में कचरा आ रहा है कचरे को छटाई करने के लिए महिला मजदूरों की कमी है. इसलिए जाम की स्तिथि है जल्द ही सुधार किया जाएगा.
-- दिनेश यादव, सीएमओ, नगर पंचायत बसना