बसना : फसल बीमा को लेकर ग्रामीणों ने कृषि विभाग पर लगाये आरोप कहा अनावारी रिपोर्ट गलत
अल्प वर्षा इस वर्ष महासमुंद जिले को सुखा ग्रस्त घोषित किया गया था. लेकिन सभी किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ मिल पाया. दस्तावेजो के अध्ययन से मालूम हुआ कि अंचल के कई गांव है जिन्हे फसल बीमा का लाभ मिला है. जबकि कई गांवों ऐसे है जहाँ कम नुकसान हुआ है और गांव के किसानों को फसल बीमा का लाभ भी मिल रहा है.
जबकि शासन ने आनावरी रिपोर्ट के आधार पर महासमुंद को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है. इसके बावजूद बीमा कंपनी और राजस्व अनावारी रिपोर्ट के पात्र किसानों को लाभ भी इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
हल्का पटवारी के अनावारी रिपोर्ट के अनुसार गांव बोइरडीह में 65% फसल की क्षति हुई और अन्य गांवों में बोइरडीह के अलावा जिस किसानों का फसल कम नुकसान हुवा है उनको भी फसल बीमा का लाभ मिला है.
इस पूरी जानकारी को 27-मई-2018 को किसानो ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सराईपाली में आये विकास यात्रा पर आवेदन के माध्यम से शिकायत करने गए थे मगर वहां भी वे मुख्यमंत्री से नहीं मिल पाए. जिससे नाराज किसानो ने 6 जून को रायपुर जा कर कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल जी से लिखित में शिकायत की इसके अलावा महासमुंद कलेक्टर एवं तहसीलदार पिथौरा से लिखित शिकायत किये थे.
कलेक्टर द्वारा भेजा गया जवाब.
ग्रामीणों को भी इस मामले में कलेक्टर द्वारा बीमा राशि नहीं मिलने का लिखित में कारण भेजकर ग्रामीणों तक पहुँचाया गया. कलेक्टर द्वारा दिए गए पत्र में बताया गया है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का पटवारी अनावारी रिपोर्ट से कोई संबंध नहीं है. ग्राम पंचायत के थ्रेस होल्ड उपज से वास्तविक औसत उपज में कमी होने पर निश्चित सूत्र से गणना कर क्षतिपूर्ति का निर्धारण किया जाता है. भेजे गए पत्र में साफ़ लिखा गया है कि फसलबीमा क्षतिपूर्ति देय हेतु यहाँ के किसान पात्र नहीं है.
ऐसे किया जाता है नुकसान का आकलन
नुकसान का आंकलन एक गांव में 8 जगहों में लगे धान की फसल को देखकर रिपोर्ट बनाई जाती है. चार जगह राजस्व तो चार जगह कृषि विभाग आंकलन करते हैं. इसी नुकसान के आधार पर बीमा तय होता है यानि उस गांव में चार किसानों की फसल अच्छी है तो बाकी किसानों की फसल भी अच्छी मानी जाती है.
ग्रामीणों ने लगाया कृषि विभाग पर आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि बीते कई वर्षों की तुलना में इस वर्ष उनके खेत में धान कम हुए है पटवारी की अनावारी रिपोर्ट में भी 65% फसल की क्षति होने का जिक्र है. लेकिन कृषि विभाग द्वारा किये भेजे आकलन रिपोर्ट गलत है उन्होंने कभी किसानों के खेत में जाकर उनके फसलों को नहीं देखा और रिपोर्ट बना कर भेज दिए. जिसके चलते उन्हें बीमा का लाभ नहीं मिल पा रहा है. जबकि खाद और बीज लेते समय ही उनके खाते से बीमा हेतु राशि काट ली जाती है. यदि योजना का लाभ नहीं दे पा रहें है तो बीमा की राशि भी खाते से काटना गलत है.
डॉ. अनामिका पॉल के समर्थन में तहसील कार्यालय का घेराव
प्रदेश जोगी कांग्रेस की प्रवक्ता अनामिका पॉल का कहना है कि किसान पहले ही सूखा और बैंक तथा साहूकारों के कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं, ऐसे में फसल बीमा नहीं मिलने से किसानों के अस्तित्व पर ही संकट आ जाएगा. जिसको ध्यान में रखकर दिनांक 27 जून 2018 को किसान के हित में एक दिवसीय सभा, धरना प्रदर्शन एवं रैली कर तहसील कार्यालय का घेराव किया गया साथ ही कहा गया कि सभी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए