निर्धारित मूलभूत मापदंडों के बिना निजी स्कूलों का संचालन, बसना शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करता
बसना - ग्रामीण क्षेत्रों में निजी स्कूलों को संचालित कर रहे अधिकांश संचालक सरकारी दिशा निर्देशो को ठेंगा दिखाकर स्कूल संचालन कर रहे हैं। विकास खण्ड बसना के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित ज्यादातर निजी स्कूलों में यहाँ तक कि बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है। इन स्कूलों का प्रति वर्ष अधिकारियों के द्वारा किया जाता है।इसके बाद भी निर्धारित मूलभूत मापदंडों के बिना निजी स्कूलों का संचालन होना शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर रहे है।उल्लेखनीय है कि निजी स्कूलों के संचालन के लिए शिक्षा विभाग से मान्यता लेनी पड़ती है। इसके लिए मानक निर्धारित किए गए हैं। जिनका पालन मान्यता प्राप्ति के पूर्व ही सुनिश्चित करना होता है। इन मानकों में स्कूल के संचालन के लिए पर्याप्त रूप से भवन की उपलब्धता के अलावा अन्य जरुरी अधोसंरचना का होना भी अतिआवश्यक है। लेकिन बसना ब्लॉक के संचालित कई स्कूल किराए के ऐसे मकानों में चल रहे हैं जहां आवश्यक सुविधाओं की नितांत कमी है।न तो इन स्कूलों में संचालित कक्षाओ के हिसाब से कमरे है और न ही पर्याप्त जगह । जबकि आर टी ई के मापदंडो के अनुसार कमरों को एक निश्चित क्षेत्रफल के अनुसार होना चाहिए।
मिली जानकारी के अनुसार कई निजी स्कूल ऐसे हैं जहां मूलभूत सुविधाएं भी विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रही हैं।किराए के मकानों में चल रहे कई निजी स्कूलों में न तो प्रसाधन की उचित सुविधा है और नही बैठने की समुचित व्यवस्था। एक ही कमरे में कई कक्षाएं लगाई जाती हैं। जानकारी के अनुसार सहशिक्षा वाले स्कूलों में छात्रों और छात्राओं के लिए अलग अलग प्रसाधनों की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। लेकिन कई स्कूलों में प्रसाधन हैं भी तो वे कचरे और गंदगी से अटे पड़े हैं। जिनकी कभी सफाई नहीं की जाती। इसकी वजह से इनका इस्तेमाल भी नहीं हो पाता। ऐसे में विद्यार्थियों खासतौर पर छात्राओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्कूल में दर्ज बच्चों की संख्या के मान से लेटण्बाथ होना चाहिए।
अप्रशिक्षित शिक्षकों से कराया जा रहा अध्यापन कार्य
निजी स्कूलों में अप्रशिक्षित शिक्षकों से भी अध्यापन कार्य कराए जाने की बातें सामने आई हैं। जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्तर के स्कूलों में नियुक्ति की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता सीमा बारहवीं और डीएड उत्तीर्ण होना है वहीं उच्च कक्षाओं के लिए स्नातक व स्नातकोत्तर होने के साथ ही बीएड अथवा डीएड की परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है लेकिन नियमों को अनदेखी करते हुए अप्रशिक्षित शिक्षकों से ही कई निजी स्कूलों में अध्यापन कार्य कराया जा रहा है। जिले के निजी स्कूलों में अप्रशिक्षित शिक्षकों से अध्यापन कार्य कराना एक बड़ी समस्या साबित हो रही है। इस बात से जिले के शिक्षा विभाग का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता ।