बसना : ई-रिक्शा चलाकर आत्मनिर्भर बनेंगी महिलाएं.
छत्तीसगढ़ राज्य में महिला स्वावलंबन की दिशा में तेजी से कदम रखने जा रहा है. पंचायती राज व्यवस्था के साथ सदन से लेकर सड़क तक राज्य की महिलाओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है. आज हर पेशे में महिलाओं की भूमिकाएं दिखलाई पड़ने लगी है. इसी दिशा में एक और कदम अब ई-रिक्शा के जरिए जुड़ गया है जिसमें महिलाएं ई-रिक्शा को परिवार की आमदनी का सहारा बनाकर तेजी से आत्मनिर्भर बनने जा रही है.
आजीविका मिशन गाँव के महिलाओं के लिए जीवन में सामाजिक और आर्थिक का बड़ा बदलाव ला रहा है. भंवरपुर वनांचल क्षेत्र के गाँव पड़कीपाली में एक महिला को ई-रिक्शा चलाते देखा गया जिन्होंने अपना नाम लक्ष्मीबाई बताया. जब लक्ष्मीबाई से पूछा गया कहा जा रही हो तो लक्ष्मीबाई ने बताया कि मै अभी ई-रिक्शा चलाने की ट्रेनिंग ले रही हूँ. अभी तक ई-रिक्शा का कागजात और लाईसेन्स नहीं मिला है. कागजात और लाईसेन्स मिलते ही बसना से भंवरपुर सवारी लाने ले जाने का कार्य करुँगी और बच्चो को स्कूल तक पहुँचाउंगी.
बड़े-बड़े महानगरो में एक महिला का ई-रिक्शा चलना भले ही आम बात होगा लेकिन भंवरपुर के पिछड़े हुए और वनांचल क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी बात है. लक्ष्मीबाई ने बताया कि उसे रुर्बंन कलस्टर मिशन और आजीविका एक्सप्रेस मिसन के तहत यह ई-रिक्शा मिला है. यह रिक्शा उसे जनपद पंचायत बसना में दिया गया जिसमे संसदीय सचिव और बसना विधायक रूपकुमारी चौधरी और जनपद सीईओ आर के वर्मा ने रिक्शा की चाबी लक्ष्मीबाई को दी. साथ ही लक्ष्मीबाई ने बताया कि ई-रिक्शा की कीमत 1 लाख 45 हजार है और सरकार से पूरा निशुल्क मिला है.