3 लोगों की जान जाने के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे अधिकारी.
सरायपाली से भंवरपुर पहुंच मार्ग के बीच कुछ हफ्ते पहले ही सड़क में गड्ढे के संपर्क में आकर एक युवक की जान चली गई थी. जिसको समाचार पत्रों में प्राथमिकता के साथ जगह मिली थी. समाचार पत्रों में प्रकाशन के बावजूद पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट के अधिकारी किसी भी मामले को गंभीरता से लेते नजर नहीं आ रहे है और उसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है.
सरायपाली से भँवरपुर के मध्य कनकेबा नाला के पास दुर्घटनाओं पर अब तक 3 लोगों की जान चली गई है. कुछ दिन पहले ही भंवरपुर पटेल परिवार का दामाद और उमरिया के जय लाल पटेल के बीच मोटरसाइकिल में आमने सामने एक्सीडेंट हो जाने के कारण एक आदमी को अपने जान से हाथ धोना पड़ा था.
उस समय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रोड के आजू-बाजू गड्ढों को बचाने के चक्कर में जान से हाथ धोना पड़ा था. चुकी उक्त मार्ग का चौड़ीकरण कम है और जब भी कोई बड़े वाहन गुजरते है तो मजबूरन दुपहिया वाहनों को गड्डे में अपने वाहन को ले जाना पड़ता है और वे हादसे का शिकार हो जाते है.
गत रात्रि 9 बजे की लगभग एक ऐसा ही दुर्घटना सामने आया जिसमे भंवरपुर क्षेत्र के समीपस्थ ग्राम कोयलारीडीह का खिरोद मोटरसाइकिल में सवार होकर सराईपाली की ओर से अपने घर आ रहा था. तभी रोड के आजू-बाजू में गड्ढे होने के कारण उसके संपर्क में आ बैठा और गिर गया. गिरने के बाद खिरोद गंभीर रूप से घायल हो गया. बताया जा रहा है कि खिरोद के सर में बहुत चोट आई है. जिसको एम्बुलेंस के मदद से स्वास्थ केंद्र पहुचाया गया है.
ज्ञात हो कि भंवरपुर से सराईपाली मार्ग को अभी कुछ महीने पहले ही मरम्मत किया गया था. लेकिन यह मरम्मत महज खानापूर्ति के लिए ही सीमित रह गया. भंवरपुर से सरायपाली के मार्ग में रोड के आजू-बाजू गड्ढों को पाटा नहीं जा रहा है. यह मार्ग दो ब्लॉक को जोड़ता है ऊपर से व्यवसाय के लिए भी एक अहम मार्ग है व्यापारी गण भी इसी मार्ग का उपयोग करते हुए गुजरते है. इसमें चारपहिया वाहन एवं ट्रक भी गुजरते रहते है.
भंवरपुर से सरायपाली जाने का शॉर्टकट मार्ग होने के कारण इस मार्ग का उपयोग अधिक संख्या में लोग करते हैं. बरसात के दिनों में गड्ढे हो जाने के कारण आए दिन फिसल कर इस मार्ग में दुर्घटना का आशंका बनी रहती है. फिर भी पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट के अधिकारी रोड की मरम्मत को लेकर ध्यान नहीं देते हैं हां ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए बिल्कुल मरम्मत का प्रावधान जरुर निकाला जाता है लेकिन सिर्फ महज खानापूर्ति होता है. जिसके चलते आजाद भारत में आम नागरिकों की जान जाती रहती है.