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बसना : सार्वजनिक वितरण प्रणाली हेतु 17 रूपए लीटर की कैरोसिन बिक रही चालीस से लेकर पचास रूपए तक में

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के गरीब लोगों तक उचित मूल्य पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना सरकार की मंशा है, लेकिन जिम्मेदार विभागीय अधिकारियो की उदासीनता के कारण यह योजना मैदानी स्तर पर फेल हो रही है। शासन ने ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में राशन दुकानें तो खोल दीं, लेकिन उनका लाभ ग्रामीण इलाकों के लोगों तक कम पहुंच रहा है। सेल्समैन की मनमानियों व विभागीय अधिकारी उदासीनता के कारण कई राशन दुकानें माह में दो चार दिन ही खुल रही है।

बसना विकास खंड के आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायतों में शासकीय उचित मूल्य की दुकान समय पर नहीं खुलते हैं। यही नहीं अधिकांश राशन दुकान माह में सिर्फ चार से पांच दिन ही खुलती हैं। समय पर व नियमित नहीं खुलने के कारण राशन लेने कार्डधारियों को काफी चक्कर लगाना पड़ता है।


बसना विकासखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों के राशन दुकान को चलाने वाले सेल्समैन द्वारा समय पर राशन दुकान नही खोला जाता है।कई राशन दुकान तो सुबह 6 बजे से खुलता है और 9 बजे बन्द हो जाता है।गांव गांव में स्थित राशन दुकान महीने में सिर्फ चार या पांच दिन ही खुलता है।उन दिनों में कोई कार्डधारी नही जा पाते हैं तो उनका उस माह का राशन ही नही मिलता।

दुकानों के लिए सेल्समैन ही उपलब्ध नहीं है। विभागीय स्तर पर अन्य दुकान के सेल्समैन के माध्यम से संचालित दुकानों के कारण हितग्राहियो को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि सेल्समैन अपनी सुविधाओं के अनुरूप अन्य शासकीय उचित मूल्य की दुकानों का संचालन कर रहे हैं, जिसमें ग्राम पंचायत के अधिकांश ग्रामीण अपने हिस्से के खाद्यान्न उठाने से वंचित रहे जाते हैं।
चालीस से लेकर पचास रूपए लीटर बिक रहा कैरोसिन.



उचित मूल्य की दुकानों पर शासकीय रेट पर कैरोसिन 17 रूपए लीटर है लेकिन बसना क्षेत्र में कैरोसिन ब्लैक मार्केट में 40 से 50 रूपए प्रति लीटर के हिसाब से बिक्री हो रहा है। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ता जिन्हें कैरोसिन की जरूरत नहीं होती वह अपने राशनकार्ड इस धंधे से जुड़े लोगों को या दुकान संचालक को दे दिया करते हैं और यही लोग उन राशनकार्डो पर तेल उठाकर कालाबाजारी ऊंची दर पर बेच देते हैं। कालाबाजारी के अधिकतर ग्राहक डीजल बेचने व वाले या फिर ट्रैक्टर चलाने वाले होते हैं। राशन दुकान के विक्रेता द्वारा भी हर माह वितरण से बचे कैरोसिन को ब्लैक में बेच दिया करते हैं। यहां तक की खेती किसानी करने वाले कुछ लोग तो स्थाई ग्राहक बने हुए है.

यह तस्वीर आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायत कुरमाडीह उचित मूल्य दुकान की है। यहाँ पर अंकित प्रबन्धक कन्हाई लाल सेट का स्थानांतरण हुवे कई वर्ष हो गये । व सेल्समैन भी अन्य ग्राम पंचायत के उचित मूल्य के दुकान पर कार्यरत हैं। इसे सेल्समैन की मनमानी कहे या फिर विभागीय उदासीनता.




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