कैसे हो समस्या का समाधान ? जब फ़ोन ही ना उठाए अधिकारी
शासन और आम जनता के बीच पारदर्शिता कैसे लायी जाए अगर सम्बंधित अधिकारी फ़ोन ही ना उठाए? बसना नगर पंचायत के सीएमओ और चिकित्सा अधिकारी बीएमओ का आलम इस कदर है कि इन्हें बार-बार बार बार फोन करने पर भी फोन नही उठाते. जिसके कारण आये दिन किसी समस्या से अवगत करना कठिन हो जाता है.
एक तरफ जहाँ शासन अंपने और जनता की बीच पारदर्शिता
लाने को कहती है तो वहीँ ये अधिकारी शासन और जनता के बीच दीवार बनकर खड़े हो जाते
है. ऐसे में लोग जाएँ कहाँ ? किसे बताएं अपनी समस्या ?
बसना के वार्ड क्रमांक 1 में 15 वर्ष पहले बनी पानी टंकी अब तक बंद पड़ी है.
वार्डवासी कई बार इस समस्या को लेकर अधिकारीयों से अवगत करा चुके है. पीएचईडी
विभाग का कहना है कि यह टंकी नगर पंचायत को हैंड ओवर कर दिया गया है उसके बावजूद
जिम्मेदार अधिकारी अब तक इस मामले के कुछ करते नजर नहीं आये. जब फ़ोन कर उनसे इस
मामले की जानकारी चाही जाती है तो उनके द्वारा फ़ोन ही नहीं उठाया जाता या तो फ़ोन
उठाकर काट दिया जाता है.
वहीँ वार्ड क्रमांक 1 के ही निवासी मनोज अपने वार्ड बने सीसी रोड में में गुणवक्ताहींन कार्य का आरोप लगा रहे है. उनका कहना है कि ठेकेदार द्वारा ठेकेदार द्वारा पूरी तरह से गुणवक्ताहींन कार्य कराया गया है. इस मामले की जब जानकारी उन्होंने बसना नगर पंचायत के सीएमओ को दी थी तब उन्होंने इस मामले में इंजिनियर से एस्टीमेट मंगवाकर जांच करने की बात कही थी. लेकिन महीनो बीत गए और जांच के लिए अब तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचे.
वहीँ बसना के ब्लाक चिकित्सा अधिकारी भी पत्रकारों का फ़ोन उठाना उचित नहीं समझते अगर कभी उठा भी लिए तो इस मामले में कुछ नहीं कहना कहकर फोन काट देते है. बीते दिनों की ही बात है भंवरपुर की एक नर्स के ट्रांसफर करने के मामले को लेकर जब श्रमजीवी पत्रकार संघ के उपाध्यक्ष संतोष पटेल ने अपने फ़ोन से बार-बार संपर्क करने का प्रयास किया तो वो उनका फ़ोन ही नहीं उठाए. जबकि किसी अन्य नंबर से उन्हें फ़ोन मिलाया तो बात हो गयी और सवाल का जवाब देने की बजाय पत्रकारों पर ही आरोप लगा दिया. नतीजा आगे चलकर इस मामले को जिला चिकित्सा अधिकारी तक ले जाना पड़ा.