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विगत 2 वर्षों से स्वास्थ्य केंद्र बंद, झोलाछाप डॉक्टर से लेकर 30 किलोमीटर दुर तक इलाज कराने जाते है मरीज.

बसना विकासखंड अंतर्गत रुर्बन मिशन के तहत चयनित आदर्श ग्राम चिपरीकोना में उप स्वास्थ केन्द्र मौजूद तो है मगर चिपरीकोना सहित उड़ेला, मुडीडीह, खोपला, चिपरी, कोन्हा, सीतलपुर, लोहड़ीपुर, सनबाहाली गांव के लगभग 15 हजार लोग इस उप स्वास्थ केन्द्र का लाभ नहीं ले पा रहे है.

इस उप स्वास्थ केन्द्र में जचकी हेतु शासन द्वारा लाखों खर्च कर एक महतारी कक्ष भी बनाया गया है मगर पिछले 2 वर्षों से यहाँ ना तो यहाँ कोई डॉक्टर पदस्थ हो पाया और ना ही ग्रामीणों को एएनएम की सुविधा मिल पाई. जबकि यहाँ के ग्रामीणों तीन बार ग्राम सुराज में भी इस समस्या के निराकरण हेतु आवेदन दे रखी है.

गौरतलब हो कि चिपरीकोना के आश्रित ग्राम खोपला तक पहुँचने हेतु पक्की सड़क का भी निर्माण नहीं कराया गया है. वनांचल और पहाड़ी शेत्र में होने के कारण  किसी गर्भवती महिला की डिलिवरी हेतु उन्हें चिपरीकोना के उपस्वास्थ केन्द्र पर ही आश्रित रहना पड़ता है. मगर चिपरीकोना के उप स्वास्थ केन्द्र बंद हो जाने के कारण इनको 30 से 40 किलोमीटर दुर तक जाना पड़ता है. ज्ञात हो कि मार्ग के आभाव में आज भी ग्राम खोपला तक चार पहिया वाहन नहीं पहुँच पता है. खोपला के ग्रामीणों का कहना है कि यदि चिपरीकोना का उप स्वास्थ केन्द्र खुल जाता तो सर्दी, खांसी, बुखार जैसे बिमारियों के लिए भी उनको दुर जाना नहीं पड़ता.


झोला छाप से इलाज कराने मजबूर ग्रामीण


ग्रामीण इलाकों में शासन ने मितानिनों को भी दवाई प्रदान कर चिकिस्ता सेवाए का विस्तार किया है. लेकिन विडंबना है कि शासन द्वारा तमाम तरह की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के बावजूद बसना ब्लॉक का ग्रामीण इलाका झोला छाप डॉक्टरों की चपेट में है.

गौरतलब है कि गांव गांव मे अपनी दुकानदारी संचालित करने वाले झोला छाप डॉक्टर मरीजो की सेहत से खिलवाड़ करने कोई कसर नही छोड़ते. ऐसे तथा कथित डॉक्टर सामान्य सर्दी खांसी बुखार से लेकर खून ट्रांस्प्लेट सहित गम्भीर बीमारियों से पीड़ित मरीज के इलाज में भी पीछे नहीं हटते.

हालांकि ऐसे मरीजों की बीमारी बढ़ने एंव प्रकरण के गम्भीर हो जाने की स्थिति में तथा कथित झोला छाप डॉक्टर ऐसे अस्पताल या नर्सिंग होम में मरीज को ले जाने की सलाह दे बैठते है जहाँ मरीज के पहुँचने की स्थिति में उनका मोटा कमीशन उन्हें हासिल हो जाता है. खास कर ग्रामीण अंचल में लचर व्यवस्था के चलते अधिकांश लोग प्राइवेट अस्पताल से महंगी स्वास्थ्य सेवाएं लेने पर विवश हैं.


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