कही संपत की समर्पण यात्रा बसना विधानसभा से चुनाव लड़ने की शुर... - CG Sandesh

कही संपत की समर्पण यात्रा बसना विधानसभा से चुनाव लड़ने की शुरुआत तो नही ? पूर्व में भी लड़ चुके है विधानसभा चुनाव

नीलांचल सेवा समित के एवं बसना नगर पंचायत के अध्यक्ष संपत अग्रवाल इन दिनों बसना विधानसभा से भाजपा के प्रबल दावेदारों में से एक है. भाजपा बसना विधानसभा से अपनी पार्टी का टिकट किसे देती है यह तो समय आने पर ही पता चलेगा. फिलहाल संपत अग्रवाल सेवा समर्पण यात्रा से गाँव-गाँव जाकर अपना जनसंपर्क बढ़ा रहे है और एक समाज सेवी के रूप में लोगों की मदत करते हुए सामने आ रहे है.

गौरतलब हो कि संपत अग्रवाल वर्त्तमान में बसना नगर पंचायत के अध्यक्ष है और 2015 के बसना नगर पंचायत चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में कुल 3834 वोट प्राप्त किये थे. और कांग्रेस के प्रत्याशी इरफान गिगानी उर्फ इल्लू को 1523 से हराया था. नगर पंचायत में शुरू से ही इन्हें जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा था. और अब राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वे बसना विधानसभा सभा से आगामी चुनाव की तैयारी में है. गाँव सहित शहरों में भी वो चर्चाओं में है. हालाकि अब तक उन्होंने खुले तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ने की बात नहीं कही है.

आपको बता दें कि इससे पहले वो 1993 में बसना विधानसभा से शिवसेना के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके है. हालाकि इस चुनाव में उनको केवल 4092 वोट ही मिले थे. और वोट के परसेंटेज की बात करें तो 5.79% इनका वोट शेयर था. बसना तब मध्यप्रदेश के अंतर्गत आता था और शिवसेना पुरे सीट से चुनाव भी नहीं लड़ती थी. इस दौर में बसना को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था.

इससे पहले 1990 के चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी महेंद्र बहादुर सिंह जी अपना चुनाव हार गए थे और जनता दल के प्रत्याशी लक्ष्मण जयदेव सतपथी जी को बसना विधानसभा से चुनाव जीत गए थे. जबकि भाजपा ने अपना प्रत्याशी ही नहीं उतारा था.  

जिसके बाद 1993 में बसना विधानसभा से नरसिंह प्रधान जी को भाजपा प्रत्याशी के रूप में उतारा गया. लक्ष्मण जयदेव जी को  कांग्रेस से टिकट मिला. उधर महेंद्र बहादुर सिंह जी को कांग्रेस से टिकट ना मिलने की वजह से वो स्वतंत्र अपना चुनाव लड़े और जीत गए. उन्हें 22090 मिले जबकि दुसरे नंबर पर रहे भाजपा प्रत्याशी नरसिंह प्रधान जी को 15909 मिले. तो वहीँ कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ रहे लक्ष्मण जयदेव जी को  13031 वोट मिले और तीसरे नंबर पर रहे.

वह दौर पूरी तरह से डिजिटलाइजेशन नहीं हुआ था. संपत अग्रवाल एक युवा और उभरते हुए नेता थे ऐसे दौर में एक युवा नेता के रूप में 4092 वोट हासिल करना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है.




अन्य सम्बंधित खबरें