स्कूल बस में ओडिया बोलने पर संचालक ने किया प्रताड़ित.
अपने बच्चों के भविष्य को लेकर माता-पिता अक्सर इस बात से चिंतित रहते है कि उनके बच्चों का दाखिला अंग्रेजी माध्यम में कराये या हिन्दी माध्यम में. कुछ लोग शोध का हवाला देते प्रारंभिक पढ़ाई में मातृभाषा के महत्व पर बल देते हैं. माता-पिता अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए खर्च की परवाह किये बिना अपने बच्चों को अंग्रेज़ी माध्यम स्कूलों में भेज रहे हैं. ये लोग अपने पैसे का बड़ा हिस्सा स्कूलों में लगा रहे हैं ताकि उनके बच्चे रोज़गार के और आगे की पढाई के लिए परेशान ना हो.
अंग्रेजी माध्यम के प्रचलन की वजह से धीरे-धीरे हिन्दी की
आत्मा यानी शुद्धता घटती जा रही है. कभी शुद्ध लिखना ही हिन्दी की पहचान थी लेकिन
इसमें कमी आ रही है. हिन्दी अब हिंग्लिश में परिवर्तित होने के साथ कुछ ऐसे शब्दों
की नई भाषा गढ़ी जा रही है जो बिल्कुल ही नई है.
ऐसे दौर में कई ऐसे स्कूल
भी है जहाँ हिन्दी केवल हिन्दी विषय की कक्षा के बोलने की अनुमति दी जाती है और उसके
बाद हिन्दी बोलने पर उन्हें सजा दी जाती है या जुर्माना भरना
पड़ता है जुर्माना पड़े तो भी वे आवाज नहीं उठाते क्योंकि उन्हें पता है स्कूल
प्रबंधन से बुराई मोल लेना मतलब बच्चे के स्कूल में रहने पर संकट और भविष्य पर खतरा.
क्योंकि सरायपाली ओडिशा के सीमांत से लगा हुआ है इसलिए यहाँ
के अधिकतर लोगों की मातृभाषा ओडिया भी है. जन्म से ही यहाँ के अधिकांश लोग यहाँ
इसी भाषा का प्रयोग करते है. वर्त्तमान दौर कहीं लोग अपनी संस्कृति भूल ना जाएँ
इसलिए अपनी मातृभाषा का उपयोग करते है है. और मातृभाषा के बोलने पर उन्हें
प्रताड़ित किया जाता है.
ऐसा ही एक मामला सामने आया है सरायपाली विकास खण्ड के अंतर्गत ग्राम
अर्जुण्डा स्थित प्राईवेट शिक्षण संस्था एकलव्य इंग्लिश मिडियम स्कूल का. कक्षा 9
वीं के बालक पोकेश कुमार साहू (पिता श्री रविकुमार साहू व्याख्याता शासकीय हायर
सेकंडरी स्कूल जम्हारी) इसी स्कूल में अध्ययनरत है.
कल जब पोकेश अपने मित्रों के साथ स्कूल बस में स्कूल जा रहे थे तो अपने मित्रों से
अपनी मातृभाषा ओडिया में बात कर रहे थे जिसे स्कूल के ही किसी अन्य छात्र ने सुन
लिया और इसकी शिकायत स्कूल प्रबंधन से कर दी जिसके बाद स्कूल के संचालक भास्कर ने
बच्चे को सभी बच्चों के समक्ष पोकेश को सार्वजनिक रूप से प्रताड़ना दिया गया.
जिससे बालक मानसिक रूप से परेशान है.
जब बच्चे के पालक से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वो योग जागरण के कार्यक्रम में घर से बहार है उनका कहना था कि पोकेश इतना प्रताड़ित हो गया है कि उसने कल रात उससे फ़ोन पर बात भी नहीं की और ना ही खाना.
चूँकि एकलव्य इंग्लिश मिडियम स्कूल है इसलिए शायद यहाँ किसी
अन्य भाषा बोलने की अनुमति नहीं होगी. इस मामले को लेकर जब स्कूल प्रबंधन से फ़ोन
पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका नंबर बंद आया. आज के दौर में अंग्रेजी
की जरूरत भले ही क्यों न हो लेकिन हम विरासत में मिली भाषा और संस्कृति को भूल
नहीं सकते. इसके बावजूद कुछ स्कूल प्रबंधनों ने विद्यार्थियों के अपने मातृभाषा
बोलने पर जुर्माने का निजी कानून बनाये तो यह अपने आप में शर्मसार करने जैसा है. इस पर रोक लगना चाहिए.
भारत विविधताओं से भरा देश है और यह हमारा गौरव है भारत की मुख्य विशेषता यह है कि यहाँ विभिन्नता में एकता है. भारत में विभिन्नता का स्वरूप न केवल भौगोलिक है, बल्कि भाषायी तथा सांस्कृतिक भी है. एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 1652 मातृभाषायें प्रचलन में हैं, जबकि संविधान द्वारा 22 भाषाओं को राजभाषा की मान्यता प्रदान की गयी है.