बिना कार्य किये ही पंचायत से निकाल लिए साढ़े नौ लाख रुपये. जाँच में आये अधिकारीयों पर लगा बचाने का आरोप
बसना ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम
पंचायत मोहका के ग्रामीणों द्वारा सरपंच, सचिव,
व रोजगार सहायक के ऊपर आरोप लगाया गया है कि वे बिना कार्य
किये शासकीय राशि का आहरण कर निजी उपयोग कर है. मामला तीन वर्ष पूर्व 2014-15 का
है. आवेदन के अनुसार ग्राम मोहका में तालाब गहरीकरण पचरी निर्माण एवं सीसी रोड का
कार्य नही किया गया है तथा दूसरे कार्य को दिखा कर राशि आहरण कर लिया है.
ग्रामीणों के अनुसार गौरटकीया तालाब गहरीकरण एवं पचरी निर्माण के लिए वर्ष 2014-15 में पंचायत द्वारा 7,58,000 की राशि आहरण कर लिया गया है. जबकि तालाब गहरीकरण एवं पचरी
निमार्ण आज तक नही हुआ है.
इसी तरह वर्ष 2014-15 मंदिर पारा में मुख्यमंत्री जन सशक्तिकरण मद से सीसी रोड के लिए 2,00,000 रुपए निर्माण कार्य के लिए राशि आहरण कर लिया गया है परन्तु सीसी रोड निर्माण का कार्य नही हुआ है.
वहीँ ग्राम पंचायत इस मामले से बचने की कोशिश कर रहे है. ग्रामीणों ने रोजगार सहायक, सरपंच एवं सचिव पर अपनी-आपानी पास बुक रखने का भी आरोप लगाया है. ग्रामीणों ने बताया है कि उनके बैंक खाते को पंचायत में ही रख लिया गया है और उनको दिया ही नहीं जा रहा है.
इस मामले की जानकारी के लिए जब पूर्व सरपंच से पूछा गया तो बताया कि जिस दिन ग्राम मोहका में शिकायत के जांच के लिए अधिकारी आये उसकी जानकारी ग्राम पंचायत एवं किसी ने उन्हें दी ही नहीं. मुझे जांच कर्मचारी ने आने के बाद बुलाया गया. जिससे मैं काम मे व्यस्त होने के कारण मना कर दिया. और अब अगर अगली बार जांच के लिए बुलाया जाएगा मैं जरूर जाऊंगा. लेकिन एक दो दिन पहले से मुझे सूचना दे तब. वर्तमान सचिव के अनुसार मामला मेरे कार्यकाल में नही हुआ है मुझे इसकी जानकारी नही है.इस मामले को लेकर जब रोजगार सहायक को फ़ोन से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया.
जिला मनरेगा विभाग के अधिकारी अरुण यादव ने बताया कि तालाब गहरीकरण में फर्जी काम
हुआ है जल्द से जल्द कारवाही की जाएगी.
यह कार्य मेरे कार्याकाल में पास हुए था लेकिन मेरे कार्यकाल में राशि का आहरण नही
हुआ है. मैं वर्तमान सरपंच को कार्य भार दे चुका था.
जांच अधिकारी ने बताया कि पूर्व सरपंच के नही आने से मामले की रिपोर्ट नही बन पाई फिर से पूर्व सरपंच एवं ग्राम पंचायत, ग्रामीणों को सूचना दे कर जांच कर दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी.
ग्रामीणों ने जाँच में आये अधिकारीयों पर लगाया बचाने का आरोप.
2014 के लोकसभा चुनाव में भ्रस्टाचार भारतीय जनता पार्टी के अहम् मुद्दों में से था. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था ना खाऊंगा ना खाने दूंगा. वर्त्तमान में छतीसगढ़ राज्य और केन्द्र दोनों में ही भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और बसना विधानसभा की बात करें तो यहाँ भी भारतीय जनता पार्टी से रूपकुमारी चौधरी विधायक है लेकिन फिर भी यहाँ भ्रस्टाचार पे कोई लगाम लगता नजर नहीं आता है. आये दिन शौचालय, आवास, सड़क और रेडी टू इट में लगातार भ्रस्टाचार के मामले सामने आते है. विकास कार्यों में रूपकुमारी का नाम अक्सर सामने आता है मगर भ्रस्टाचार को लेकर कभी कोई कार्यवाही करती नजर नहीं आती है. ऐसे में अगर ग्रामीणों ने अधिकारीयों पर सरपंच और सचिव को बचाने का आरोप लगाया है तो क्या इस मुद्दे को लेकर वो कोई कार्यवाही करती है या नहीं ये देखने वाली बात होगी. केवल जांच प्रतिवेदन देने से भ्रस्टाचार जैसे मामलों में कोई कार्यवाही नहीं होती है.