कई रहस्यमयी कहानियों भरा है ग्राम बरतियाभांटा का इतिहास - CG Sandesh

कई रहस्यमयी कहानियों भरा है ग्राम बरतियाभांटा का इतिहास

राजधानी रायपुर से 150 किलो मीटर के दूरी पर महासमुन्द जिले के बसना ब्लाक से 16 किलो मीटर के दुरी पर भँवरपुर होते हुए सागरपाली मार्ग में बसा है एक विचित्र गांव बरतियाभांटा.

बरतियाभांटा 2 शब्दों के संयोग से बना है पहला बरतिया मतलब स्त्री पुरुष के विवाह की प्रकिया दूसरा भांटा जिसका अर्थ है गांव या स्थान.

बताया जाता है कि बारातियों के समान आकृति वाले पत्थरो के कारण इस गांव का नाम पड़ा बरतियाभांटा 3 हजार की आबादी वाले इस गांव के बारे में कई रोचक और रहस्यमयी कहानियां है.

कहा जाता है प्राचीन काल में यहां ऋषि मुनियों का आश्रम हुआ करता था. एक बार जब बाराती रात्रि भोज और विश्राम के लिए यहाँ रुके तभी मुनियों ने रात्रि भोज के लिए बारातियों को आग्रह किया. जिसके बाद बारातियों द्वारा ऋषी मुनियों का अपमान किया गया. इस कारण मुनियों ने क्रोध में आकर बारातियों को पत्थर हो जाने का श्राप दे दिया और तब से बाराति यहाँ पत्थर में तब्दील हो गए.

एक दूसरी काहानी के अनुसार लोग बताते है ठाकुरों के बारात वापसी के समय यहां रात्रि में विश्राम के लिए रुकी थी और किसी गलती के कारण दैवीय योग से सारे बाराती और वस्तुए पत्थर में तब्दील हो गई जिस कारण इस गाँव का नाम बाराती पत्थरो का स्थान बरतियाभांटा पड़ा

जानकार बुजुर्ग आज भी इस कहानी बड़े उत्साह से सुनाते है, और कहते है पहले इस पत्थरो से दर्द से कराहने की आवाजें आती थी. और सुबह शाम रहस्यमय सुगंध भी आया करती थी आज जिसका श्रोत को किसी को पता नही चल सका.

इसी के प्रतिरात्मक रुप मे आज भी ग्राम वासी अपने ग्राम देवता ठाकुर देव की पूजा अर्चना करते है मान्यता है कि ये ठाकुर देवता गांव की प्राकर्तिक आपदा और महामारियों से रक्षा करते है.

कहते है कि यहां से कोई पत्थर को ले जाने की कोशिश करता है तो इसका खामियाजा बीमारी पागलपन अथवा मौत के रूप में भगतना पड़ता है. बताया जाता है कि पहले कुछ लोगों ने यहाँ से पत्थरो को घर ले जाने की भी कोशिश कि और पागल हो गए कई लोगो को जान से हाथ धोना पड़ा कुछ लोग वापिस भी कर दिए जिसके कारण वो बच गए.

बताया जाता है छोटे-छोटे पत्थरों के सांथ बड़े-बड़े पत्थरो में भी पहले दैवीय शक्ति होती थी. पहले इनको कोई हिला नही पाता था. लेकिन अब इन पत्थरों में दैवीय शक्तियों का प्रभाव नही रहा.

कभी इन पत्थरों के कारण पुरातात्विक दृष्टि से प्रशिद्ध यह गांव जिन पत्थरो ने यहां इस गांव को पहचान दिलाई उन्ही लोगो ने इन पत्थरों को उपेक्षित कर दिया.



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