धन का महत्त्व हुआ ज्ञान से अधिक, बच्चों का भविष्य अन्धकार में डाल हड़ताल कर रहे शिक्षक.
कहते है कि ज्ञान का
महत्त्व धन से अधिक होता है मगर छत्तीसगढ़ के स्कूल की स्थिति को देखकर ऐसा नहीं बिल्कुल
भी नहीं लगता. छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के धन को ज्ञान से अधिक महत्त्व देने के कारण
लगातार कई वर्षों से बच्चों का भविष्य अन्धकार में है. हड़ताल के चलते कभी भी समय
पर बच्चों की पढाई पूरी नहीं हो पाई.
इससे पहले लगातार कई वर्षों से शिक्षाकर्मी हर वर्ष पढाई के बीच में बच्चों का भविष्य अन्धकार में छोड़कर हड़ताल करते नजर आये है महीने भर की इनकी हड़ताल से ना जाने कितने ही बच्चों को कम समय में अपना पाट्यक्रम पूरा करने को मजबूर होना पड़ा होगा.
पाट्यक्रम भी ऐसा जो निजी
स्कूल भी तय समय में ख़त्म करने के लिए अतिरक्त कक्षाएं लागाते है ना जाने कैसे उन
बच्चों का पाट्यक्रम पूर्ण कर दिया गया होगा हड़ताल के समय सिर्फ मध्यान्ह भोजन के
लिए पहुँचते थे.
हड़ताल के चलते मज़बूरी में सरकार ने इनकी बात सुनी वेतन के साथ इन्हें संविलियन
भी किया गया. मगर संविलियन पूरी तरह से नहीं हो पाया या एक तरह से कहा जाए सरकार
ने शिक्षाकर्मी संगठन को तोड़ने में सफ़लता हासिल की. आज भी कुछ शिक्षाकर्मी सरकार
पर इस प्रस्ताव का गलत ढंग से लाने का आरोप लगा रहे है और भविष्य में फिर से
आन्दोलन करने की चेतावनी भी दे चुके है.
शिक्षाकर्मीयों की मांग पूरी होने के बाद मानों छत्तीसगढ़ में हड़ताल की बाढ़ आ गई.
कई संगठन के लोग अलग-अलग समय पर हड़ताल कर सरकार पर दबाव बनाते नजर आये. जिसमे बैंक
कर्मियों से लेकर स्वास्थ विभाग तक के कर्मचारी सामिल रहे हड़ताल के चलते किसी के
पैसे अटके तो किसी को अपनी जान गवानी पड़ी. बीच में यह भी स्थिति थी की एम्बुलेंस की
सेवाएं भी बंद हो गई थी.
इसी क्रम में आज शिक्षक वर्ग से एक संघ अनुदान प्राप्त शिक्षक 5 सितंबर याने की शिक्षक दिवस के दिन से ही बच्चों का भविष्य को अन्धकार में छोड़कर हड़ताल में है. अनुदान प्राप्त स्कूलों के शिक्षक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है. इनके द्वारा 7 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल किया जा रहा है. शिक्षाकर्मियों के समान वेतनमान, नियमित शिक्षक कर्मचारियों को सातवां वेतनमान देने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को गेच्युटी का भुगतान एक माह में करने सहित अन्य मांगे की जा रही हैं.
छत्तीसगढ़ में 461 अनुदान प्राप्त स्कूलों में 32 सौ शिक्षक कार्यरत हैं, जो अभी हड़ताल पर है और ना जाने कितने की छात्रों का भविष्य अंधकारों में इनके द्वारा सरकार के के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा है साथ ही मांग पूरी नहीं होने तक हड़ताल जारी रखने की बात कर रहे है. जबकि इस हड़ताल के विरोध में कई पालक विगत दिनों रायपुर में सड़कों पर भी आ चुके है.