कम उम्र में ही करोड़पति बन जाते हैं इस तारीख में जन्‍मे लोग,... - CG Sandesh

कम उम्र में ही करोड़पति बन जाते हैं इस तारीख में जन्‍मे लोग, ये खूबियां बनाती हैं खास

अंकों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है। कोई अंक किसी व्यक्ति के लिए शुभ होता है, तो कोई अंक किसी के लिए। अंक शास्त्र में 1 से 9 अंकों तक का वर्णन मिलता है। हर अंक का स्वामी ग्रह कोई न कोई ग्रह होता है। आज हम मूलांक 5 के लोगों के बारे में जानेंगे। किसी भी माह की 5, 14 और 23 तारीख को जन्में लोगों का मूलांक 5 होता है। मूलांक 5 के स्वामी ग्रह बुध ग्रह माने जाते हैं। बुध ग्रह के प्रभाव से इस मूलांक के लोग खूब धन कमाते हैं। काफी कम उम्र में ही ये लोग अच्छा बैंक बैलेंस बना लेते हैं।

अंक शास्त्र के अनुसार मूलांक 5 के जातक धन जोड़ने में माहिर माने जाते हैं। ये लोग कम उम्र में ही अच्छा खासा बैंक बैलेंस बना लेते हैं। ये मनी माइंडेड होते हैं। खुलकर खर्च करने और जमकर मेहनत करने पर विश्वास करते हैं। अपनी मेहनत के दम पर ही लाइफ में एक ऊंचा स्थान पाते हैं। बुध ग्रह को वाणी का कारक भी कहा गया है।



इन जातकों के अंदर काफी खूबसूरती होती है। मूलांक 5 के जातक बुद्धि के बल पर हर स्थिति को अपने हिसाब से ही संभाल लेते हैं। इतना ही नहीं, विपरीत से विपरीत परिस्थिति में भी शांत बने रहते हैं। इनके अंदर एकाग्रता का अभाव होता है। ये हर काम में जल्दबाजी दिखाते हैं और इसी कारण ये चोट खा लेते हैं।

इस मूलां के लोग को व्यापार और उद्योग में काफी सफलता हासिल होती है। इन्हें अर्थशास्त्र और म्यूजिक में बहुत इंट्रस्ट होता है। इन जातकों को दिमाग संबंधित रोगों का सामना कर पड़ सकता है। ये लोग कम उम्र में ही बड़े व्यवसायी बन जाते हैं। सामने वाले को अपनी बातों से आकर्षित करके बिजनेस में खूब धन कमाते हैं।

अंक शास्त्र के अनुसार मूलांक 5 का स्वामी ग्रह बुध होता है इसलिए इन्हें बुध देव की उपासना करनी चाहिए। इस अंक जातकों के लिए मां सरस्वती और भगवान गणेश की पूजा शुभ फलदायी होती है। गणपति की पूजा से इनकी सभी समस्याएं दूर होंगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।




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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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