मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में पत्रकार बैठे जमीन पर, महिला पत्रकार भी शामिल.
आज 30 सितंबर को
मुख्यमंत्री के आगमन पर व्यवस्था पूरी शुन्य पर दिखी. कार्यक्रम के दौरान व्यवस्था
ऐसी रखी गई थी की देश के चौथे स्तम्भ कहे जाने वाले पत्रकारों को जमीन पर बैठना
पढ़ा. जहाँ पत्रकारों को बैठने के लिए व्यवस्था रखी गई थी वहां. भाजपा के कार्यकर्ता
विराजमान थे.
मुख्यमंत्री कार्यक्रम के
दौरान जब वहां पहुंचे हुए पत्रकारों को काफी समय तक खड़ा रहना पड़ा पत्रकारों को यह
भी समझ नहीं आ रहा था कि उनके बैठने की जगह कहाँ है, जिस लाइन में मिडिया लिखा था
वहां भाजपा कार्यकर्ता मीडिया कर्मियों को देखने के बावजूद अपनी जगह नहीं छोड़ रहे
थे.
मजबूरन सभी पत्रकारों को
हड़ताल कर जमीन पर बैठना पड़ा जिसमे एक महिला पत्रकार भी शामिल थी. जमीन पर बैठा देख
मजबूरन वहां के लोगों को बैठने की व्यवस्था करनी पड़ी. पर फिर भी उन्हें मिडिया
वालों के स्थान में बैठने की जगह नहीं मिली जो कार्यकर्ता वहां बैठे थे बैठे ही
रहे.
कार्यक्रम के जितनी बैठक व्यवस्था रखी होगी उतने ही पास जारी किये गए होंगे. मगर कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के आने के ठीक आधे घंटे पूर्व बिना पास देखे किसी को भी अंदर आने दे दिया जा रहा था. जिसमे अधिकतर बीजेपी कार्यकर्ता ही थे. अगर व्यवस्था के हिसाब से पास दिए गए होते तो ये नौबत नहीं आत.
कार्यक्रम में दिखा काले रंग का खौफ.
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान काले रंग का ऐसा डर दिखा कि जो काले कपड़े पहनकर अंदर तो आ गए थे मगर बाद में उन्हें वापस लौटने कहा जा रहा था. इस रंग का खौफ इस कदर दिखा की पुलिस ने लोगों के काले मौजे भी उतरवा दिए साथ ही एक मीडियाकर्मी को यह कहकर बहार कर दिया गया की आपके बैग काले रंग का है आप इसे साथ नहीं रख सकते जबकि अंदर आते समय किसी भी प्रकार को चेकिंग नहीं की गई थी.