महिला सुरक्षा व साइबर सुरक्षा पर बसना महाविद्यालय में पुलिस अधीक्षक श्री संतोष सिंह के निर्देशन पर लगी कार्यशाला.
महासमुंद जिले के पुलिस अधीक्षक श्री संतोष सिंह के निर्देशन पर शनिवार को हमर पुलिस हमर संग के मास्टर ट्रेनर मनोज डडसेना ने बसना महाविद्यालय में एक कार्यक्रम का आयोजन कर छात्र-छात्राओं को सेफ्टी और साइबर क्राइम के बारे में विस्तार से जानकारी देकर उसके प्रति जागरूक किया.
उन्होने साइबर क्राइम के बारे मे जानकारी देते हुए बताया की अगर आप लोगो के मोबाईल नम्बर पर फोन आता है और फोन करने वाला व्यक्ति आपका खाता नम्बर, आधार कार्ड या बैक संबंधित कोई जानकारी पासवर्ड या OTP मांगता है तो, उसे इससे संबंधित कोई जानकारी न दें. अगर कोई व्यक्ति फोन पर कहता है आप का इनाम निकला है या आप को विजेता चुना गया है. तो किसी के झांसे मे नही आयें. नही तो आप ठगी के शिकार हो सकते है. उन्होंने बताया की बैंक द्वारा कभी भी फ़ोन करके किसी भी प्रकार की गोपनीय जानकारी जैसे की पासवर्ड या OTP नहीं माँगा जाता है.
उन्होंने छात्राओं को अपनी सुरक्षा करने के लिए जागरूक किया और आत्मरक्षा के गुर सिखाए. उन्होंने कहा कि पुलिस लड़कियों व महिलाओं की सुरक्षा करने के लिए सदैव तत्पर है. छात्राओं को स्वयं भी अपनी सुरक्षा के लिए जागरूक रहने की आवश्यकता है. कई छोटी-छोटी बातें है, जिन्हें हर छात्रा को ध्यान में रखने की आवश्यकता है.
उन्होंने कहा कि महिला में अगर आत्मविश्वास है तो उसे पुरूष से कम नही आंका जा सकता. कोई मनचला किसी छात्रा से छेड़छाड़ या हमला करे तो अपनी रक्षा करते हुए उसे तुरंत सबक सिखाए, लेकिन इसके लिए आत्मरक्षा के गुर सीखना बहुत आवश्यक है. उन्होंने छात्र-छात्राओं को आत्मरक्षा के कई गुर भी सिखाए. इसमें बताया गया कि अगर कोई हमलावर किसी छात्रा पर हमला कर दे तो किस प्रकार उससे बचा जा सकता है. बचाव के लिए डैमो करके भी दिखाया गया.
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की प्राचार्य सुश्री सीमा अग्रवाल भी मौजूद थी साथ ही कार्यक्रम को लेकर छात्र-छात्राओं के काफी उत्साह देखने को मिला.
कार्यक्रम के
दौरान पता चला कि एक छात्रा मीनाकुमारी साव का जन्मदिन है, जिसे मास्टर ट्रेनर
मनोज डडसेना के साथ पुरे महाविद्यालय की तरफ से जन्मदिन की बधाई दी गई. अपने
जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने एक कविता भी सभी को सुनाई..
"कलम है मेरी पहचान, छोड़ इसे कैसे करूँ श्रृंगार.
कलम से करती हूँ
देश को होशियार, ताकि ना हो
भ्रष्टाचार. छोड़ इसे कैसे
करूँ श्रृंगार.
कुमकुम से बसता
एक परिवार, कलम से जागते
हजार परिवार.
शिक्षा से ही देश
की विकास, छोड़ इसे कैसे करूँ श्रृंगार.
सिंदूर, कंगन सुहाग की निशान है अगर, तो कलम मेरे देश की आधार.
कलम से ही उन्नति
की आस, छोड़ इसे कैसे करूँ श्रृंगार.
काश होता कलम
कुमकुम का श्रृंगार साथ-साथ.
कि बना सकूँ
परिवार को देश, देश बन सके
परिवार जिसमे हो
स्वाभिमान और संस्कार"
--मीना कुमारी साव