आखिर क्यों जारी है मजदूरों का पलायन ? - CG Sandesh

आखिर क्यों जारी है मजदूरों का पलायन ?

महासमुंद जिले के बसना थाना अंतर्गत महीने भर के भीतर दूसरी बार पलायन की बात सामने आई. ख़बर थी की ग्राम कपसा खुटा में बड़ी संख्या में लोग पलायन कर रहे है ये बताया जा रहा था कि लोग दलालों के माध्यम से पलायन कर रहे थे, पलायन की सुचना मिलते ही पुलिस की टीम ने पलायन करने वालों को रोका और बताया गया कि ये लोगों को बहला फुसला कर रुपयों का लालच देकर ईटा भट्टी में मजदुरी करवाने हेतु अन्य राज्य ले जा रहे थे.

पलायन रोके जाने के बाद लोग लगातार शासन और प्रशासन को अपने सवालों के घेरे में ले रहे थे उनका कहना था कि “हर गांव का यही हाल है सभी जगह सेटिंग के आधार पर दिन दहाड़े सरदार निजी गाड़ियों में लेबर ले जा रहे हैं”

पलायन रोकने के सुझाव में शासन से मिल रही सुविधा से भी वंचित करने की बात कही गयी श्रम विभाग के अधिकारीयों पर निष्क्रियता का आरोप भी लगा, कार्यवाही नही होने से उनके हौसले बुलंद होने के जैसे बात भी कही गयी.

क्यों जारी है पलायन
इन सब आरोपों के बीच किसी ने भी मजदूरों से पलायन का कारण जाने की कोशिश नहीं की, पलायन को लेकर पिरदा क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि गाँव में हमेशा मनरेगा के तहत काम नहीं मिलता है, बरसात के समय खेती की शुरुआत में कुछ दिन काम तो मिलते है मगर काम के बदले उचित मजदुरी नहीं दी जाती है. गाँव में जितना कमाओ ख़त्म हो जाता है इसलिए 3 से 5 महीने तक गाँव के लोग अन्य राज्यों में मजदुरी करने चले जाते है. उनका कहना है कि कोई अपने परिवार से दूर रहना नहीं चाहता है. “मजबूर हैं पलायन के लिए क्या करें ?"  

ईटा भट्टी की तरफ पलायन करने वाले लोगों का कहना है कि दुसरे राज्य जाकर काम करने से उन्हें अच्छी रकम मिल जाती है जिससे उनके घर परिवार का गुजारा चलता है. यदि सरकार हमारे लिए रोजगार यहीं दे दे तो हमें कभी भी अन्य राज्यों की तरफ नहीं जाना पड़ेगा.

क्यों नहीं हो पाती है कार्यवाही.
नियमानुसार श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूर दलाल ही श्रमिकों को किसी दुसरे स्थान में काम के लिए ले जा सकता है, श्रम विभाग में पंजीकृत ठेकेदार को मजदुर सरदार माना जाता है. इनके द्वारा कितने मजदूरों को अन्य प्रदेशों में ले जाया जा रहा है तथा उनकी रोजी, सुविधा की क्या व्यवस्था है इसके बारे में श्रम विभाग के पास जानकारी देनी होती है. देखा जाए तो लोग अपनी इच्छा से पलायन के लिए जाते हैं. इसलिए बिना शिकायत इन पर कार्यवाही नहीं हो पाती है.



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